पृष्ठ तनाव (Surface tension)

पृष्ठ तनाव (Surface tension):

  • द्रव के भीतर का अणु संसंजक बल के कारण अपने पड़ोसी अणुओं के द्वारा आकर्षित होता है। द्रव का ऊपरी पृष्ठ  सतह स्वतंत्र होता है, जिसे स्वर पृष्ठ (free surface) कहा जाता है। द्रव के ऊपरी पृष्ठ के नजदीक न होकर द्रव के भीतर होने वाला अण अपने पड़ोसी अणओं से चारों तरफ पूर्णरूपेण घिरा होता है। ऐसा अणू अपने पडोसी अणुओं द्वारा सभी दिशाओं में समान रूप से आकर्षित किया जाता है इसलिए किसी एक दिशा में परिणामी खिंचाव (resultant pull) शून्य होता है। द्रव के स्वतंत्र पृष्ठ /सतह के नजदीक का अणु के ऊपर कोई अन्य द्रव अणु नहीं होते इसलिए ऐसा अणु नीचे की ओर खिंचाव महसूस करता है। चूँकि द्रव के ऊपरी सतह के नजदीक के सभी अणु इसी तरह नीचे की ओर आकर्षण बल महसूस करते हैं इसलिए द्रव एस काम करता है मानोकि वह तना हुआ इलास्टिक (elastic membrane) हो जो जहां तक संभव हो अपने को सिकोडने का प्रयास कर रहा हो। अतः द्रव का पृष्ठ/सतह ऐसे व्यवहार करता है जैसे कि वह तनाव (Tension) में हो।

इस प्रकार. द्रव का स्वतत्र पृष्ठ सदैव तनाव में रहता है तथा उसमें कम से कम फल प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है। द्रव के पृष्ठ का यह तनाव ही पृष्ठ तनाव कहलाता है।

पृष्ठ तनाव से संबंधित उदाहरण

  1. पतली सुई पृष्ठ तनाव के कारण ही पानी पर तैराई जा सकती है।
  2.  साबुन, डिटर्जेण्ट आदि जल का पृष्ठ तनाव कम कर देते हैं, अतः वे मैल में गहराई तक चले जाते हैं, जिससे कपड़ा ज्यादा साफ होता है।
  3.  साबुन के घोल के बुलबुले बड़े इसीलिए बनते हैं कि जल में साबुन घोलने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।
  4.  स्थिर जल की सतह पर मच्छरों का लार्वा तैरते रहते हैं, परन्तु जल में मिट्टी का तेल छिड़क देने पर उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है, जिससे लार्वा पानी में डूबकर मर जाते हैं।
  5.  गरम सूप स्वादिष्ट लगता है, क्योंकि गरम सूप का पृष्ठ तनाव कम होता है, अतः वह जीभ के ऊपर सभी भागों में अच्छी तरह फैल जाता है।
  6.  पृष्ठ तनाव के कारण ही पानी से बाहर निकालने पर शेविंग ब्रश के बाल आपस में चिपक जाते हैं।
  7.  समुद्र की लहरों को शांत करने के लिए उन पर तेल डाल दिया जाता है।

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