भारत के प्रायद्वीपीय पठार

भारत के प्रायद्वीपीय पठार

भारत के भौतिक प्रदेश ( Indian Physical territory )

  • भारत की भौगोलिक आकृतियों को निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है
    (A) उत्तर की हिमालय पर्वत श्रृंखला
    (B) प्रायद्वीपीय पठार
    (C) तटवर्ती मैदान
    (D) भारतीय द्वीप समूह

(B) प्रायद्वीपीय पठार

  • प्रायद्वीपीय पठार गोंडवाना लैंड का भाग है। इसकी आकृति त्रिभुजाकार है। यह राजस्थान से कुमारी अन्तरीप तक (1700 कि.मी.) तथा गुजरात से पश्चिम बंगाल (1400 कि.मी.) तक 16 लाख वर्ग कि.मी. क्षेत्र पर विस्तृत है। नर्मदा नदी का भ्रंशन इस पठार को दो असमान भागों में बाँटता है।

प्रायद्वीपीय पठार

मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ दक्कन का पठार
1. अरावली श्रेणी 1. सतपुड़ा श्रेणी
2. पूर्वी राजस्थान की उच्च भूमि 2. महाराष्ट्र का पठार
3. मालवा का पठार 3. महानदी बेसिन
4. बुन्देलखण्ड उच्च भूमियाँ 4. दण्डकारण्य
5. विन्ध्याचल-बघेलखंड 5. तेलंगाना (आन्ध्र) पठार
6. छोटा नागपुर का पठार 6. कर्नाटक का पठार
7. मेघालय का पठार 7. तमिलनाडु का पठार
  8. पश्चिमी घाट
9. पूर्वी घाट

 मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ

  1.  अरावली श्रेणी-यह श्रेणी पालनपुर (गुजरात) से राजस्थान होकर दिल्ली तक लगभग 800 कि.मी. लम्बाई में विस्तृत है। इसका सर्वोच्च शिखर गुरू शिखर (1722मी.) आबू की पहाड़ियों में स्थित है। इन्हें उदयपुर के उत्तर पश्चिम में जर्गा पहाड़ियाँ, टोडगढ़ के निकट मारवाड़ की पहाड़ियाँ, अलवर के निकट हर्षनाथ पहाड़ियाँ तथा उत्तर में दिल्ली रिज भी कहा जाता है।
  2. मालवा का पठार-इसकी सीमाओं का निर्धारण उत्तर में अरावली, दक्षिण में विन्ध्य श्रेणी एवं पूर्व में बुन्देलखण्ड द्वारा होता है। इस पठार के उत्तर में चंबल नदी अवनालिका अपरदन करती है।
  3.  बुन्देलखण्ड बघेलखण्ड विन्ध्याचल मालवा पठार के उत्तरी भाग को बुंदेलखण्ड एवं उत्तर-पूर्वी भाग को बघेलखण्ड कहा जाता है। बुंदेलखण्ड पठार नीस चट्टानों से निर्मित है और मालवा के पठार के दक्षिणी सिरे से विन्ध्य श्रेणी लगभग 1050 कि.मी. लम्बाई में विस्तृत है। विन्ध्य श्रेणी के दक्षिण में नर्मदा की संकीर्ण घाटी है जिसका निर्माण अधोभ्रंशन (down faulting) द्वारा हुआ। नर्मदा जबलपुर के निकट धुआँधार प्रपात बनाती है।
    4. छोटानागपुर का पठार-इसका विस्तार बिहार,झारखण्ड, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में पाया जाता है। महानदी. स्वर्णरेखा, सोन व दामोदर इस पठार की मुख्य नदियाँ हैं। इसमें ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों की प्रधानता है। इस पठार को भारत का रूर कहा जाता है। यहाँ पाए जाने वाले खनिजों में लोहा, कोयला, अभ्रक, ताँबा, यूरेनियम, एवं टंगस्टन प्रमुख हैं। दामोदर घाटी एक भ्रंश के रूप में है।
    5. मेघालयका पठार यह प्रायद्वीपीय पठार का बहिर्शायी है। यह भ्रंशन के कारण भारतीय प्रायद्वीप से माल्दा गैप द्वारा पृथक हो गई है। इस पठार में गारो,खासी,जयन्तिया, मिकिर, और रेंगमा पहाड़िया स्थित हैं। शिलांग शिखर (961मी.) इस क्षेत्र का उच्चतम शिखर है।

दक्कन का पठार

  • यह त्रिभुजाकार पठार, पूर्वी तथा पश्चिमी घाटों, सतपुड़ा, मैकाल तथा राजमहल पहाड़ियों के बीच 7 लाख वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है। इसकी ऊँचाई 500-1000 मीटर है। इसमें जीवाश्म रहित ग्रेनाइट, नीस, बेसाल्ट, चूना पत्थर एवं क्वार्ट्ज शैलें मिलती हैं।

1. सतपुड़ा श्रेणी-यह नर्मदा एवं ताप्ती नदियों की घाटियों के मध्य स्थित है। इस श्रेणी में राजपिपला पहाड़ियाँ, महादेव पहाड़ियाँ तथा मैकाल श्रेणी सम्मिलित हैं। पंचमढ़ी के निकट महादेव पर्वत पर स्थित धूपगढ़ (1350मी.) सतपुड़ा पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी है। अमरकण्टक (1064मी.) मैकाल पर्वत का सर्वोच्च शिखर एवं सतपुड़ा श्रेणी की दूसरी मुख्य चोटी है।
2. महाराष्ट्र का पठार-कोंकण तट एवं सह्याद्रि को छोड़कर यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में विस्तृत है। इस पठार की 5 सूक्ष्म इकाइयाँ हैं
(i) अजन्ता की पहाड़ियाँ
(ii) गोदावरी घाटी
(iii) अहमद नगर- बालाघाट पठार
(iv) भीमा बेसिन एवं
(v) महादेव उच्च भूमि
3. महानदी बेसिन-इसे छत्तीसगढ़ का मैदान भी कहते हैं। पश्चिम सिरे पर मैकाल श्रेणी तथा दक्षिणी सिरे पर राजहरा पहाड़ियाँ हैं, जिनकी रचना धारवाड़ शैलों से हुई है।
4. ओडिशा उच्च भूमि-गर्जात पहाड़ियाँ, उत्कल तट के किनारे स्थित हैं। इस उच्च भूमि में मलयागिरि (1169 मी.), मेघसानी (1157 मी.) स्थित हैं।
5. दण्डकारण्य-यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ एवं आन्ध्र प्रदेश में विस्तृत है। इसमें तेल, उदान्ती, सबरी एवं सिलेरू नदियाँ बहती हैं। प्रदेश के दक्षिणी पश्चिमी भाग में मलकानगिरि का पठार स्थित है।
6. तेलंगाना (आन्ध्र) पठार-इस पठार की दो सूक्ष्म इकाइयाँ हैं-तेलंगाना एवं रायलसीमा उच्च भूमियाँ। रायलसीमा पठार एक समतल भूमि है।
7. कर्नाटक का पठार-यह कर्नाटक एवं केरल के कुछ भाग पर स्थित है। मुलानगिरि (1923मी.) बाबाबूदन पहाड़ियों की सर्वोच्च शिखर है।
8. तमिलनाडु का पठार-यह पठार दक्षिणी सह्याद्रि तथा तमिलनाडु तटीय मैदानों पर विस्तृत है। यहाँ जावादी, शिवराय, कालरायन तथा पंचमलाई की पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। जावादी एवं शिवराय पहाड़ियों में इसकी रचना नीस एवं चा!काइट से हुई है। 9. पश्चिमी घाट (सह्याद्रि-यह तापी के मुहाने से कन्याकुमारी तक 1600 कि.मी. लंबे क्षेत्र में विस्तृत है। ये अवरोधी पर्वत (Block mountain) हैं। उत्तरी सह्याद्रि का सर्वोच्च शिखर काल्सुवाई (1646 मी.) है। महाबालेश्वर (1438 मी.) दूसरी प्रमुख चोटी है जहाँ से कृष्णा नदी निकलती है।
• दक्षिणी सह्याद्रि का सर्वोच्च शिखर कुद्रेमुख (1892 मी.) है।
पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट के पर्वत नीलगिरि पर्वत ग्रंथि में मिलते हैं जिसका सर्वोच्च शिखर डोडाबेट्टा (2637 मी.) है (दक्षिणी भारत का दूसरा सर्वोच्च शिखर) । ऊँटी (उटकमक) नीलगिरि में स्थित है।
नीलगिरि के दक्षिण में अन्नामलाई की पहाड़ियाँ हैं। इसकी अनाइमुण्डी चोटी (2695 मी.) है (दक्षिण भारत का सर्वोच्च शिखर)। यह पालघाट के दर्रे द्वारा नीलगिरि से अलग है।
अन्नामलाई की एक शाखा उत्तर-पूर्व में पलनी की पहाड़ियाँ तथा दक्षिण में कार्डिमम (इलाइची) की पहाड़ियों के रूप में फैली हुई है। कार्डियम पहाड़ियों के दक्षिण में नागर कोयल की पहाड़ियाँ हैं। कोडाइकनाल पलनी की पहाड़ियों में स्थित है।

पश्चिम घाट के प्रमुख दरें
(उत्तर से दक्षिण)

  1. थालघाट दर्रा-मुम्बई-नागपुर-कोलकाता रेलमार्ग एवं सड़क मार्ग गुजरते हैं।
    2. भोरघाट दर्रा-मुम्बई-पुणे-बेलगाँव-चेन्नई रेलमार्ग एवं सड़क मार्ग गुजरते हैं।
    3. पालघाट पुणे-कालीकट-त्रिचूर-कोयम्बटूर-कोच्चि के रेल व सड़क मार्ग गुजरते हैं।
    4. सेनेकोटा दर्रा-तिरुअनन्तपुरम एवं मदुरै को जोड़ता है।

पूर्वी घाट — यह महानदी की घाटी से नीलगिरि तक 1800 कि.मी. की लम्बाई में फैला है। उत्तर से दक्षिण की ओर पाई जाने. वाली पहाड़ियाँ का क्रम है
शेवराय, जवादी, नल्लमलाई, पालकोंडा एवं नीलगिरि महेन्द्रगिरि (1501 मी.) पूर्वी घाट की सर्वोच्च चोटी है।

उत्तर भारत का मैदान

  • यह मैदान उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार के बीच 7 लाख वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है। यह एक काँपीय प्रदेश है, जो सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से निर्मित है। ये मैदान 2400 कि.मी. लम्बाई तथा 150-480 कि.मी. चौड़ाई में विस्तृत है।

काँप के निक्षेपों की प्रकृति, प्रवणता, अपवाह आदि के आधार पर विशाल मैदान को निम्न भागों में बाँटा गया है

  1.  भाबर-यह शिवालिक तलहटी के सहारे सिन्धु से तिस्ता नदी तक स्थित है। यह 8-16 कि.मी. चौड़ी पट्टी है, जिसकी रचना बजरी, पत्थर कंकड़ से हुई है। अधिक सरन्ध्रता के कारण छोटी-छोटी नदियाँ विलुप्त हो जाती हैं। यह प्रदेश कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है।
  2.  तराई-यह भाबर के दक्षिण में 15-30 कि.मी. चौड़ी दलदली पट्टी है, जहाँ नदियाँ पुनः प्रकट होती हैं।
  3.  बांगर-यह पेटी उच्च भूमि या पुरानी काँप के निक्षेपों से निर्मित काँपीय वेदिकाएँ हैं। इनमें कैल्सियम कार्बोनेट या
    कंकड़ की अधिकता पाई जाती है।
    4. खादर-यह पेटी बाढ़ के मैदानों की नवीन काँप को सूचित करती है, जो प्रतिवर्ष बाढ़ के समय सिल्ट के नए निक्षेपों से समृद्ध होती है। इसकी उपजाऊ शक्ति में प्रतिवर्ष वृद्धि होती हैं।
    5. डेल्टा-डेल्टाई मैदान मुख्यतः कीचड़ तथा दलदल युक्त होता है। इसमें उच्च भूमियाँ चार तथा दलदली (निम्न) भूमियाँ बील कहलाती हैं।

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