मानव तंत्र ( Human System ) | कंकाल तंत्र (Skeleton System)

मानव तंत्र ( Human System ) | कंकाल तंत्र (Skeleton System) ,

मानव तंत्र ( Human System ) | कंकाल तंत्र (Skeleton System)

  • मानव शरीर के भीतर अंगों के कई ऐसे समूह होते हैं जो एक दूसरे से जुड़े होते हैं या एक साथ मिलकर सामूहिक रूप में कार्य करते हैं। इसी तरह कई अंग मिलकर एक तंत्र का निर्माण करते हैं। प्रमुख तंत्र निम्नलिखित हैं
  1.  तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
    2. कंकाल तंत्र (Skeleton System)
    3. अन्तःस्रावी तंत्र (Endocrime System)
    4. उत्सर्जन तंत्र (Excretory System)
    5. श्वसन तंत्र (Respiratory System)
    6. पाचन तंत्र (Digestive System)
    7. परिसंचरण तंत्र (Circulatory System)

2. कंकाल एवं पेशी तंत्र (Skeleton System)

  • कंकाल तंत्र विभिन्न अस्थियों से मिलकर बना होता है जो शरीर को आकार एवं दृढ़ता प्रदान करता है।
  • लंबी हड्डियों के मध्य में स्थित मज्जा (Bone Marrow) में लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है।

मनुष्य में तीन प्रकार की पेशियां होती हैं

  1.  रेखिक (ऐच्छिक)
    2. अरेखिक (अनैच्छिक)
    3. हृदय पेशी
  • रेखिक पेशियों के संकुचन से गति एवं चलना संभव होता है। जबकि अरेखिक पेशियां आंतरिक अंगों जैसे-आंत व अमाशय में पायी जाती हैं एवं वहां की गति के लिए उत्तरदायी होती है।

कंकाल तंत्र के प्रकारः ये दो प्रकार के होते हैं :

  1. बाह्य कंकाल (Exo-skelton)
  2. अन्तः कंकाल (Endo-skeleton)

अन्तः कंकाल : संरचनात्मक दृष्टि से अन्तःकंकाल दो भागों से मिलकर बना होता है: |
(1) अस्थि एवं (2) उपास्थि।

  • अस्थि (Bone) : अस्थि एक ठोस, कठोर एवं मजबूत संयोजी ऊतक(Connective tissue) है जो तन्तुओं एवं मैट्रिक्स (Matrix) का बना होता है। इसके मैट्रिक्स में कैल्सियम और मैग्नेशियम के लवण पाये जाते हैं तथा इसमें अस्थि कोशिकाएं एवं कोलेजन तंतु व्यवस्थित होते हैं। कैल्सियम एवं मैग्नेशियम के लवणों की उपस्थिति के कारण ही अस्थियां कठोर होती है।
  • मोटी एवं लम्बी अस्थियों में एक खोखली गुहा पायी जाती है, जिसे मज्जा गुहा (Marrow cavity) कहते हैं। मज्जा गुहा में एक प्रकार का तरल पदार्थ पाया जाता है जो अस्थि मज्जा (Bone marrow) कहलाता है। अस्थि मज्जा मध्य में पीली तथा अस्थियों के सिरों पर लाल होती है।
  • लाल अस्थि मज्जा लाल रुधिर कणिकाओं (RBCs) का निर्माण करती है जबकि पीली अस्थि मज्जा श्वेत रुधिर कणिकाओं (WBCs) का निर्माण करती है।
  • लाल अस्थि मज्जा केवल स्तनधारियों में पायी जाती है।
  • उपास्थि (Cartilage) : उपास्थि का निर्माण कंकाली संयोजी ऊतकों से होता है। इसके मैट्रिक्स के बीच स्थित रिक्त स्थान में छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, जिसे लैकुनी (Cacunee) कहते हैं।

मानव कंकाल तंत्र


मनुष्य के कंकाल में कुल 206 अस्थियां होती हैं। मानव शरीर की सबसे लंबी एवं शक्तिशाली अस्थि फीमर है जो जांघ में पायी जाती है। कंकाल तंत्र को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:

I . अक्षीय कंकाल (Axial skeleton) :

  • इसके अन्तर्गत खोपड़ी (Skull), कशेरुक दण्ड (Vertebral Column) तथा छाती की अस्थियां आती हैं।

2. अनुबंधी कंकाल (Appendicular skeleton) :

  • इसके अन्तर्गत मेखलाएं (Girdles) तथा हाथ-पैरों की अस्थियां आती हैं।

खोपड़ी: खोपड़ी की मुख्य अस्थियां निम्न हैं:

1. फ्रॉण्टल (Frontal) 2.पेराइटल (Parietal) 3.ऑक्सिपिटल (Occipital)
4. टेम्पोरल (Temporal) 5. मेलर (Maler) 6. मैक्सिला (Maxilla)
7. डेण्टरी (Dentary) 8. नेजल (Nasal)

कशेरुक दण्ड (Vertebral column):

  • मनुष्य का कशेरुक दण्ड 33 कशेरुकों से मिलकर बना होता है। मनुष्य की पृष्ठ सतह पर मध्य में सिर से लेकर कमर तक एक लम्बी, मोटी एवं छड़ के समान अस्थि पायी जाती है, जिसे कशेरुक दण्ड (Vertebral column) कहते हैं।
  • कशेरुक दण्ड का विकास नोटोकॉर्ड (Notochord) से होता है।

 मांसपेशियां

  • पेशियां त्वचा के नीचे होती हैं। सम्पूर्ण मानव शरीर में 500 से अधिक पेशियां होती है। ये दो प्रकार की होती है। ऐच्छिक पेशियां मनुष्य के इच्छानुसार संकुचित हो जाती हैं। अनैच्छिक पेशियों का संकुचन मनुष्य की इच्छा द्वारा नियंत्रित नहीं होता है।

पेशियों के प्रकार

  • पेशियों का निर्माण कई पेशी तंतुओं के मिलने से होता है। ये पेशीतंतु पेशीऊतक से बनते हैं। पेशियां रचना एवं कार्य के अनुसार तीन प्रकार की होती हैं
  1. रेखित या ऐच्छिक.
  2. अरेखित या अनैच्छिक तथा
  3. हृदयपेशी
  • ऐच्छिक पेशियां, अस्थियों पर संलग्न होती है तथा संधियों पर गति प्रदान करती है। पेशियां नाना प्रकार की होती है तथा कंडरा या वितान बनाती है। तंत्रिका तंत्र के द्वारा ये कार्य के लिए प्रेरित की जाती है। पेशियों का पोषण रुधिरवाहिकाओं के द्वारा होता है। शरीर में प्रायः 500 पेशियां होती है। ये शरीर को सुंदर, सुडौल, कार्यशील बनाती हैं। इनका गुण संकुचन एवं प्रसार करना है। कार्यों के अनुसार इनके नामकरण किए गए हैं। शरीर के विभिन्न कार्य पेशियों द्वारा होते हैं। कुछ पेशी समूह एक दूसरे के विरुद्ध भी कार्य करते हैं जैसे एक पेशी समूह हाथ को ऊपर उठाता है, तो दूसरा पेशी समूह हाथ को नीचे करता है, अर्थात् एक समूह संकुचित होता है, तो दूसरा विस्तृत होता है। पेशियां सदैव स्फूर्तिमय रहती हैं। मृत व्यक्ति में पेशी रस के जमने से पेशियां कड़ी हो जाती हैं। मांसवर्धक पदार्थ खाने से, उचित व्यायाम से, ये शक्तिशाली होती हैं। कार्यरत होने पर इनमें थकावट आती है तथा आराम एवं पोषण से पुनः सामान्य हो जाती हैं।

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