मानव तंत्र ( Human System ) | तंत्रिका तंत्र (Nervous System) 

मानव तंत्र ( Human System ) | तंत्रिका तंत्र (Nervous System) ,

मानव तंत्र ( Human System ) | तंत्रिका तंत्र (Nervous System) 

  • मानव शरीर के भीतर अंगों के कई ऐसे समूह होते हैं जो एक दूसरे से जुड़े होते हैं या एक साथ मिलकर सामूहिक रूप में कार्य करते हैं। इसी तरह कई अंग मिलकर एक तंत्र का निर्माण करते हैं। प्रमुख तंत्र निम्नलिखित हैं
  1.  तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
    2. कंकाल तंत्र (Skeleton System)
    3. अन्तःस्रावी तंत्र (Endocrime System)
    4. उत्सर्जन तंत्र (Excretory System)
    5. श्वसन तंत्र (Respiratory System)
    6. पाचन तंत्र (Digestive System)
    7. परिसंचरण तंत्र (Circulatory System)

1. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)

  • तंत्रिका तंत्र संवेदी अंगों, तंत्रिकाओं, मस्तिष्क, मेरुरज्जू एवं तंत्रिका कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्यतया मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु के द्वारा किया जाता है। समस्त तंत्रिका तंत्र अनेक तंत्रिका कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। एक तंत्रिका कोशिका दूसरी से एक अत्यन्त सूक्ष्म अंतर द्वारा अलग होती है। यह तंत्र विभिन्न अंगों के बीच समन्वय तथा बाह्य वातावरण के प्रति प्राणी की उत्तेजनशीलता के लिए उत्तरदायी होता है।

तंत्रिका तंत्र मनुष्य में सर्वाधिक विकसित होता है। मनुष्य में इसके दो भाग हैं:

  1.  केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र
    2. परिधीय तंत्रिका तंत्र

केन्द्रीय तंत्रिका तंत्रः

  • केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क व मेरूरज्जू से मिलकर बना होता है। समस्त वातावरण से आयी संवेदनाएं केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में पहुंचती हैं। यहीं से किसी भी प्रतिक्रिया के लिए आदेश दिए जाते हैं।

परिधीय तंत्रिका तंत्रः

  • यह तंत्र मस्तिष्क एवं मेरुरज्ज से निकलने वाली तंत्रिकाओं से बना होता है, जिन्हें क्रमशः कपालीय तंत्रिकाएं एवं मेरुरज्जु तंत्रिकाएं कहते हैं। मनुष्य में 12 जोड़ी कपालीय तंत्रिकाएं एवं 31 जोड़ी मेरुरज्जु तंत्रिकाएं होती हैं।
  • परिधीय तंत्रिका तंत्र को भी दो भागों में बाटा जा सकता है:

कायिक तंत्रिका तंत्रः

  • इस तंत्र में अपवाही एवं अभिवाही दोनों प्रकार की तंत्रिकाएं पायी जाती हैं। इसका कार्य प्राणी को बाह्य परिवेश के प्रति समायोजित करना है।

स्वायत्त तंत्रिका तंत्रः

  • यह तंत्र कुछ मस्तिष्क एवं कुछ मेरुरज्जु तंत्रिकाओं का बना होता है। यह शरीर के सभी आंतरिक अंगों एवं रक्त वाहनियों को तंत्रिकाओं की आपूर्ति करता है।

तंत्रिका तंत्र के कार्य

  1.  तंत्रिका तंत्र विभिन्न अंगों की भिन्न-भिन्न क्रियाओं को संचालित एवं नियंत्रित करता है।
    2 यह समस्त मानसिक कार्यों को नियंत्रित करता है।
    3. यह मनुष्य को बाहरी वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया करने में मदद करता है।
    4. यह विभिन्न ग्रन्थियों एवं ऊतकों के प्रकार्यों में समन्वय बनाकर शरीर के आन्तरिक पर्यावरण का नियमन करता है।

तंत्रिका विकार

  • पार्किंसन रोगः यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं।
  • मिर्गीः यह एक तंत्रिकातंत्रीय विकार है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं और दौरे के समय व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है जिससे उसका शरीर लड़खड़ाने लगता
  • अल्जाइमर रोगः यह भूलने का रोग है। अल्जाइमर से दिमाग की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवन शैली और सिर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है।

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