हरियाणा की भौगोलिक स्थिति

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति ,

हरियाणा की भौगोलिक स्थिति

हरियाणा प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 44.212 वर्ग कि.मी. है। नवगठित हरियाणा में पुराने संयुक्त पंजाब राज्य का 35.18 प्रतिशत भाग आया है। यह प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से केरल, त्रिपुरा, मेघालय, गोवा, नगालैंड, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर को छोड़कर भारत के शेष राज्यों से छोटा है। इस प्रदेश की आबादी हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से अधिक है।

हरियाणा के जिलों का क्षेत्रफल एवं मुख्यालय

जिला क्षेत्रफल (वर्ग किमी) मुख्यालय 
अम्बाला 1,574 अम्बाला
भिवानी 4,778 भिवानी
फरीदाबाद 743 फरीदाबाद
फतेहाबाद 2,538 फतेहाबाद
गुड़गांव 2,714 गुड़गांव
हिसार 3,983 हिसार
झज्जर 1,834 झज्जर
करनाल 2,702 करनाल
कुरुक्षेत्र 2,520 कुरुक्षेत्र
मेवात 1,530 नूंह
महेन्द्रगढ़ 1,874 नारनौल
रोहतक 1,899 रोहतक
सिरसा 1,745 सिरसा
सोनीपत 4,277 सोनीपत
कैथल 2,122 कैथल
पानीपत 2,317 पानीपत
पंचकुला 1,268 पंचकुला
रेवाड़ी 898 रेवाड़ी
यमुनानगर 1,768 यमुनानगर
पलवल 1,368 पलवल

हरियाणा की  प्राकृतिक रूपरेखा

  • हरियाणा प्रदेश भारत के उत्तर-पश्चिम में 27°39′ से 30°55′ उत्तर अक्षांश और 74°28 से 77°36′ पूर्व रेखांश के बीच में स्थित है। पूर्वी हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर यमुना नदी बहती है। हरियाणा के उत्तर में शिवालिक पर्वतमाला और हिमाचल प्रदेश है तथा इसके पश्चिम में पंजाब है। दक्षिण में अरावली की पहाड़ियाँ और राजस्थान का रेगिस्तान है इसकी जनसंख्या लगभग 2 करोड़ 53 लाख से अधिक है। भारतीय उपमहाद्वीप में हरियाणा की भौगोलिक स्थिति तथा थार रेगिस्तान में ऊपरी वायु उच्चताप के निकट होने के कारण हरियाणा में वर्षा के परिणाम पर काफी असर पड़ता है। इसके कारण प्रदेश के विभिन्न स्थानों में वर्षा कम होती है। हरियाणा का मैदानी भाग समुद्रतल से 700 से 900 फीट ऊँचा है। हरियाणा को चार प्राकृतिक भागों में बाँटा जा सकता है:

1. शिवालिक का पहाडी क्षेत्र
2 मैदानी क्षेत्र
3. रेतीला क्षेत्र
4. अरावली की पहाड़ियों का शुष्क मैदानी भूखण्ड
1. शिवालिक का पहाड़ी क्षेत्रः शिवालिक पर्वत की श्रेणियों हरियाणा राज्य के उत्तरी-पूर्वी भाग में स्थित है। ये पहाड़ियों अधिक ऊँची नहीं हैं, इन पर्वत श्रेणियों की ऊँचाई 000 मीटर से लेकर 2300 मीटर तक है। इन पहाड़ियों से घग्घर, टांगरी, मारकण्डा तथा सरस्वती नदियां निकलती हैं। इन पहाड़ियों पर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष पाये जाते हैं। इस भाग में चूने का पत्थर भी मिलता है जो सीमेण्ट बनाने के काम आता है।
2. मैदानी क्षेत्रः मैदानी क्षेत्र प्रदेश का सबसे बड़ा भाग है। यह उत्तर से दक्षिण तक फैला हआ है। इस भाग में गर्मियों में अधिक गर्मी तथा सर्दियों में अधिक सर्दी पड़ती है। यहाँ वर्षा भी अच्छी होती है। इसीलिए मैदान क्षेत्र में शीशम, पीपल, बड़, आम, नीम तथा जामुन के वृक्ष पाये जाते हैं। इसी भाग में वीवीपुर तथा नजफगढ़ की प्रसिद्ध झीलें स्थित हैं।
3. रेतीला क्षेत्रः हरियाणा का पश्चिमी भाग, जो राजस्थान से लगा हुआ है, रेतीला है। इस भाग में जगह-जगह रेत के छोटे-छोटे टीले पाये जाते हैं जिन्हें टिब्बे कहते हैं। यहाँ पर तेज और गर्म हवाएं चलती हैं। वर्षा कम होती है. इसलिए कीकर, कैर, थोर आदि के वृक्ष तथा काँटेदार झाड़ियाँ पाई जाती हैं जो जलाने के काम आती हैं। महेन्द्रगढ़, भिवानी, सिरसा तथा हिसार जिले के भाग रेतीले हैं।
4. अरावली की पहाड़ियों का शुष्क मैदानी भूखण्डः हरियाणा में स्थित अरावली की शुष्क पहाड़ियाँ यहाँ के दक्षिण में स्थित हैं। ये राजस्थान में स्थित अरावली का ही हिस्सा है। प्रदेश का यह भाग ऊँचा-नीचा व कटा-फटा है। इन पहाड़ियों से चूना तथा स्लेट का पत्थर निकाला जाता है। यहाँ वर्षा कम होती है इसलिए यहाँ कांटेदार झाड़ियाँ तथा कांटेदार वृक्ष पाये जाते हैं। हरियाणा में गुड़गांव जिले के मेवात क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियाँ स्थित हैं।

 

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