राजस्थान में कृषिगत विकास एवं योजनाएँ

राजस्थान में कृषिगत विकास एवं योजनाएँ ( Agro-Based Development in Rajasthan )

1. राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना-

  • प्राकृतिक आपदाओं, कृमियों एवं रोगों के कारण संसूचित फसल के नष्ट होने की स्थिति में कृषकों को वित्तीय सहायता एवं बीमा कवरेज प्रदान करने हेतु राज्य के सभी जिलों में यह योजना खरीफ-2003 से प्रारम्भ की गई है। इसमें रबी की 9 फसलों के साथ अब खरीफ की 11 फसलों-मक्का, बाजरा, ज्वार, मूंग, मोठ, चवला, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द, तिल एवं ग्वार को भी शामिल कर लिया है।

2. वर्षा बीमा योजना-

  • भारतीय कृषि बीमा कम्पनी लि. द्वारा यह योजना वर्ष 2004 में प्रायोगिक तौर पर आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के बीस केन्द्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारम्भ की गई है। राजस्थान में हाड़ौती अंचल में यह योजना लागू की गई है।

3. किसान स्वास्थ्य सुरक्षा योजना

  • यह योजना 1 अप्रैल, 2006 से लागू की गई है। योजना में शामिल किसान 1 लाख रुपये तक की सर्जरी चिकित्सा करवा सकेंगे। बीमाधारी को एटीएम कार्ड की तरह राजकार्ड मुहैया कराया जाएगा।

4. राष्ट्रीय बम्बू मिशन-

  • राज्य में बाँस की खेती को बढ़ावा देने हेतु वर्ष 2006-07 में राज्य के 12 जिलों-बाँसवाड़ा, बाराँ, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, करौली, सवाईमाधोपुर, सिरोही एवं उदयपुर में लागू किया गया है।

5. राष्ट्रीय बागवानी मिशन-

  • केन्द्र सरकार द्वारा उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने हेतु केन्द्र व राज्य की 85:15 की भागीदारी से 2005-06 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम 24 जिलों में चल रहा है।

6. माइक्रो इरीगेशन योजना

  • राज्य में सीमित जल संसाधन के प्रभावी एवं समुचित उपयोग हेतु बूंद-बूंद (ड्रिप) व फव्वारा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने वर्ष 2006-07 में यह योजना प्रारम्भ की है। व्यय केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा 80:20 के अनुपात में वहन किया जाता है।

7. किसान भवन–

  • राज्य के सातों सम्भाग एवं जिला मुख्यालयों पर किसानों का बेहतर आवास और कृषि प्रशिक्षण की सुविधाएँ देने के लिए किसान भवनों का निर्माण शुरू किया गया है।

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