जलवायु परिवर्तन (Climate Change)

जलवायु परिवर्तन का अर्थ Meaning of Climate Change

  • नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका ExamSector.Com में। दोस्तों इस पोस्ट की मदद से में आपको जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के बारे में बताऊंगा। कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) किस कारण होता है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से हमारे को क्या फ़ायद है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भारत में अक्सर देखा जाता है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इंसान और जानवरों के लिए अति आवशयक है।
  • जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से आशय किसी भी क्षेत्र या प्रदेश के औसत मौसम सम्बन्धी दशाओं में बड़े पैमाने पर दीर्घकालिक परिवर्तन से है।जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भारत में अक्सर देखा जाता है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इंसान और जानवरों के लिए अति आवशयक है। सामान्यत: इन बदलावों का अध्ययन पृथ्वी के इतिहास को दीर्घ अवधियों में बाँटकर किया जाता है। जलवायु की दशाओं में ये बदलाव प्राकृतिक एवं मानवजनित (Anthropogenic) कारणों से हो सकते हैं। इस परिवर्तन का प्रभाव क्षेत्रीय के साथ-साथ वैश्विक (Global) भी हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन के साक्ष्य Evidence of Climate Change

पृथ्वी पर उसकी उत्पत्ति से लेकर अब तक जलवायु में अनेक परिवर्तन हुए हैं। पूर्व में हुए इन परिवर्तनों के साक्ष्य (Evidence) निम्नलिखित हैं।

  • भूगर्भिक अभिलेखों से हिमयुगों (Ice Ages) और अन्तर-हिमयुगों (Inter-Ice Ages) में क्रमशः परिवर्तन की प्रक्रिया का परिलक्षित होना।
  • ऊँचाई के क्षेत्रों व उच्च अक्षांशों (Latitude) में हिमानियों (Glacier) के आगे बढ़ने व पीछे हटने (Advances and Retreats) के अवशेषी चिह्न।
  • हिमानी निर्मित झीलों में अवसादों का निक्षेपण उष्ण व शीत युगों के होने को उजागर करता है। इस क्रम में यह उल्लेखनीय है कि कैम्ब्रियन, आडविसियन व सिल्युरियन युगों में पृथ्वी गर्म थी।
  • वृक्षों के तनों में पाए जाने वाले वलय (Ring) भी आई व शुष्क युगों की उपस्थिति का संकेत देते हैं।
  • ये सभी साक्ष्य इंगित करते हैं कि जलवायु परिवर्तन एक निरन्तर (Continuous) प्रक्रिया है, जो सभी कालों में होती रही है।

जलवायु परिवर्तन के कारण Causes of Climate Change

  • जलवायु परिवर्तन के प्रमुख दो कारण हैं—प्राकृतिक तथा मानवीय

प्राकृतिक कारण Natural Causes

(i) सौर कलंक

  • सूर्य पर काले धब्बे की संख्या बढ़ने पर मौसम ठण्डा व आर्द्र (Wet) हो जाता है और तूफानों की संख्या बढ़ जाती है, जबकि संख्या घटने पर उष्ण व शुष्क दशाएँ पैदा होती हैं।

(ii) मिलैंकोविच दोलन सिद्धान्त

  • यह सिद्धान्त सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के कक्षीय लक्षणों में बदलाव या पृथ्वी के अक्षीय झुकाव आदि में परिवर्तन के आधार पर पृथ्वी को प्राप्त होने वाले सूर्यातप (Insolation) की मात्रा के घटने व बढ़ने के आधार पर जलवायु परिवर्तन की व्याख्या करता है।

(iii) ज्वालामुखी क्रिया

  • इसके द्वारा वायुमण्डल में आए पदार्थ व गैसें पृथ्वी पर आने वाले सूर्यातप की मात्रा को कम कर देती हैं। हाल ही में हुए पिनाटोबा व एल सियोल ज्वालामुखी उद्भेदनों के बाद पृथ्वी का औसत ताप कुछ हद तक गिर गया था।

(iv) वायुमण्डल के गैसीय संयोजन में परिवर्तन का सिद्धान्त

  • वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड, मीथेन, जलवायु आदि की मात्रा में निरन्तर परिवर्तन होता रहता है। औद्योगिक क्रान्ति (Industrial Revolution) के बाद जब से पेट्रोलियम, कोयले तथा प्राकृतिक गैस का सदुपयोग बढ़ा है, तब से वायुमण्डलीय गैसों की संरचना में तेजी से परिवर्तन हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन का कारक बना है।

मानवजनित कारण Man Made Causes

(i)    वन विनाश

  •  वन भूतल के लिए प्राकृतिक छतरी का निर्माण करते हैं, क्योंकि ये मानव द्वारा उत्सर्जित गैसों को सोखकर वायुमण्डल के हरित गृह प्रभाव (Green House Effect) को कम करते हैं। वस्तुतः वन अपनी वृद्धि के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO,) का प्रयोग करते हैं। अतः वनों के विनाश से वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो रही है।

(ii) कृषि

  •  जलवायु परिवर्तन में कृषि से जुड़े क्रियाकलापों ने भी योगदान दिया है। आज हम परम्परागत खेती के बजाय आधुनिक खेती की तरफ उन्मुख हैं। रासायनिक उर्वरकों का अन्धाधुन्ध उपयोग कृषि में बढ़ा है। जलमग्न चावल की जुताई (Ploughing) से मीथेन (CH,) का उत्सर्जन होता है। जुगाली करने वाले पशु भी वातावरण में मीथेन का उत्सर्जन करते हैं। इससे ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ता है, जिसके फलस्वरूप जलवायु परिवर्तन होती है।

(iii) जीवाश्म ईधन

  • जीवाश्म आधारित ईंधन के दोहन से भी कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO,) जैसी गैसों का उत्सर्जन बढ़ा है। इस मानवजनित उत्सर्जन से भी जलवायु परिवर्तन की समस्या विकराल हुई है। जीवाश्म आधारित ईंधन के दहन (Combustion) से जहाँ ग्रीन हाउस गैसों का संचयन बढ़ा है, वहीं वायु एवं जल प्रदूषण (Air and Water Pollution) भी बढ़ा है।

(iv) शहरीकरण और औद्योगिकीकरण

  • जलवायु परिवर्तन के लिए औद्योगिकीकरण तथा शहरीकरण (Industralise and Urbanisation) में उत्तरोत्तर वृद्धि मानवजनित प्रमुख कारणों में से एक है। प्रकृति का अन्धाधुन्ध दोहन कर मानव औद्योगिकीकरण तथा शहरीकरण में वृद्धि कर रहा है, जो व्यापक रूप से जलवायु को प्रभावित करता है।

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