राजस्थान में शिक्षा का विकास

राजस्थान में शिक्षा का विकास ( Development of education in Rajasthan )

  • राजस्थान में 19वीं सदी के प्रारम्भिक काल में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली पर आधारित शिक्षण संस्थाएँ स्थापित की जाने लगी।
  • यहाँ के शासकों, जागीरदारों एवं सामन्तों के बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा प्रदान करने हेतु 1876 ई. में गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो की पहल पर अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना की गई।
  • 1943 ई. में जयपुर की महारानी गायत्री देवी द्वारा जयपुर में लड़कियों का प्रथम पब्लिक स्कूल-MGD गल्र्स स्कूल खोला गया।
  • 1947 में जयपुर में सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज एवं राज्य के पहले विश्वविद्यालय राजपूताना विश्वविद्यालय (वर्तमान राजस्थान विश्वविद्यालय) प्रारम्भ हुआ।
  • राज्य में एकीकरण के समय राज्य में साक्षरता केवल 8.5% थी। इसमें महिलाओं की साक्षरता मात्र 2.66% ही थी। तत्कालीन पुरुष साक्षरता 13.86% थी।
  • 1950 में राज्य सरकार ने बीकानेर में प्राथमिक व माध्यान शिक्षा निदेशालय की स्थापना की। शिक्षा में गुणवत्ता लाने एव व्यवस्था में सुधार के लिए वर्ष 1997 में इसका विभाजन कर बीकानेर में ही पथक-पथक ‘प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ‘माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना का गई।
  • केन्द्र सरकार द्वारा जारी शिक्षा विकास सचकांक में राजस्थान का प्राथमिक शिक्षा में देश में 18वाँ स्थान एवं उच्च प्राथमिक शिक्षा में 19वाँ स्थान है। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासनिक विश्वविद्यालय ने (NUPA) की ओर से जनवरी, 2009 में जारी किए गये शिक्षा सूचकांक 2007-08 में राजस्थान देश में 22वें स्थान पर रहा।

राजस्थान में प्रारम्भिक शिक्षा

  • प्राथमिक शिक्षा के विकास हेतु राज्य में शिक्षा हेतु स्वीकृत योजना का लगभग 60% व्यय प्रारम्भिक शिक्षा पर किया जा रहा है, साथ ही नामांकन वृद्धि एवं ठहराव सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
  • वर्तमान में 8 पूर्व प्राथमिक, 51724 प्राथमिक तथा 49669 उच्च प्राथमिक शालाएँ कार्यरत हैं।

राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा

  • वर्तमान में राज्य में 6231. राजकीय माध्यमिक विद्यालय तथा 3108 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।
  • राज्य में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा पर किए जा रहे व्यय में से बालिकाओं की शिक्षा पर लगभग 33.33 प्रतिशत राशि व्यय की जा रही है।

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