राजस्थान की प्रमुख झीलें ( Part-1 )

Major lakes of Rajasthan ( राजस्थान की प्रमुख झीलें )

राज्य की झीलों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

  1. खारे पानी की झीले
  2. मीठे पानी की झीलें 

राज्य की खारी झीलों को ‘टेथिस सागर’ का अवशेष माना जाता है।

1. खारे पानी की झीलें

राजस्थान की खारे पानी की झीलों की उत्पत्ति एवं नमक के स्रोत के बारे में विभिन्न विद्वानों के विचार—

  • हूम्स-विशाल जलाशय द्वारा (आंतरिक जल प्रवाह की नदियों द्वारा परिपूरित)।
  • नोटोलिंग-लवणीय जल के सोतों द्वारा (लवणीय चट्टानें)।
  • हॉलेण्ड एवं क्राइस्ट-ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली द.प. मानसूनी पवनों द्वारा कच्छ की खाड़ी से अपने साथ सोडियम क्लोराइड के कण लाकर राजस्थान में छोड़े जाते हैं।

सांभर झील (जयपुर-नागौर)

  • सांभर झील 27° से 29° उत्तरी अक्षांशों एवं 74° से 75° पूर्वी देशान्तरों के मध्य जयपुर एवं नागौर जिलों में स्थित है।
  • भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील ‘सांभर’ की समुद्रतल से औसत ऊँचाई 367 मी. है।
  • इस झील में मन्था (मेढ़ा), रूपनगढ़, खारी, खण्डेला इत्यादि नदियों सहित विभिन्न नाले जल लाते हैं जिनका अपवाह क्षेत्र 500 वर्ग किमी. से भी ज्यादा है।
  • सांभर झील की अधितम लम्बाई 32 किमी. तथा चौड़ाई 3 से 12 किमी. है।
  • झील का अधिकतम क्षेत्रफल वर्षा ऋतु में 145 वर्ग किमी. तक हो जाता है।
  • झील में 4 मीटर की गहराई तक नमक की अनुमानित मात्रा 350 लाख टन है।
  • भारत सरकार की हिन्दुस्तान नमक कम्पनी द्वारा 1964 में ‘सांभर साल्ट परियोजना प्रारम्भ की गई, जो यहाँ पर नमक का उत्पादन करती है।
  • यहाँ पर सोडियम सल्फेट बनाने का एक कारखाना भी है।
  • देश के कुल नमक का 8% सांभर झील से प्राप्त किया जाता है।
  • यहाँ पर मुगलकाल से ही नमक निकाला जा रहा है।

डीडवाना झील (नागौर)

  • 27° उत्तरी अक्षांश एवं 74° पूर्व देशान्तर पर स्थित डीडवाना झील की लम्बाई लगभग 4 किमी. चौड़ाई 3 से 6 किमी. है, यहाँ पर वर्ष भर नमक तैयार किया जाता है।
  • यहाँ पर राजस्थान सरकार द्वारा सोडियम सल्फेट बनाने का सबसे बड़ा संयंत्र स्थापित किया गया है। क्लोराइड की जगह सल्फेट की मात्रा अधिक होने से यहाँ का नमक प्रायः खाने में अयोग्य है। इसका उपयोग चमड़ा व रंगाई-छपाई उद्योग में किया जाता है (औद्योगिक नमक)

पचपदरा झील (बाड़मेर)

  • यह झील बाड़मेर जिले के बालोतरा से 25 किमी. उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह वर्षा पर निर्भर नहीं है, बल्कि नित्यवाही जल स्रोतों से पर्याप्त खारा जल मिल जाता है।
  • यहाँ के नमक में सोडियम क्लोराइड (Nacl) की मात्रा 98% तक होने के कारण, यह खाने की दृष्टि से सर्वोत्तम होता है। यहाँ पर राजस्थान सरकार का राजकीय लवण स्रोत है।
  • यहाँ पर नमक का उत्पादन परम्परागत रूप से खारवाल जाति के लोगों के द्वारा ‘मोरली’ नामक झाड़ी की टहनी की सहायता से किया जाता है। यहाँ का नमक उत्तम किस्म का होता है।

लूणकरणसर झील (बीकानेर)

  • यह झील उत्तरी राजस्थान में बीकानेर जिले में बीकानेर-श्रीगंगानगर मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग सं.15) पर लूणकरणसर कस्बे के निकट स्थित है।
  • यह उत्तरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील है। खारापन कम होने की वजह से स्थानीय मांग की पूर्ति का ही नमक उत्पादित होता है।

राजस्थान में खारे पानी की अन्य प्रमुख झीलें

(i) कावोद एवं पोकरण (जैसलमेर)।
(ii) डेगाना एवं कुचामन (नागौर)।
(ii) कोछोर एवं रैवासा (सीकर)।
(iv) फलौदी (जोधपुर)।

  • सांभर, डीडवाना, पचपदरा में छोटी-छोटी नमक उत्पादक निजी संस्थाएँ हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘देवल’ कहते हैं।
  • राजस्थान में नमक की सबसे बड़ी मण्डी नावां (नागौर) है।

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