मात्रक पद्धतियाँ ( System of unity )

System of unity in hindi

मात्रक पद्धतियाँ ( System of unity )

System of unity in hindi 

भौतिक राशियाँ के मूल मात्रकों के आधार पर निम्नलिखित पद्धतियाँ प्रचलित हैं..

  • (i) C.G.S. (सेन्टीमीटर-ग्राम-सेकण्ड) पद्धति या गॉसीय पद्धति
  • (ii) M.K.S. (मीटर-किलोग्राम-सेकण्ड) पद्धति या जॉर्जी (Gorgi) पद्धति
  • (iii) F.P.S (फुट-पाउण्ड-सेकण्ड) पद्धति
  • (iv) International System of Units (S.I.) (अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति)

C.GS. पद्धति या मैट्रिक पद्धति-इस पद्धति में द्रव्यमान, लम्बाई, समय को क्रमशः ग्राम, सेन्टीमीटर, सेकण्ड में नापा जाता है।

M.K.S. पद्धति-इस पद्धति में द्रव्यमान, लम्बाई, समय को क्रमशः किलोग्राम, मीटर, सेकण्ड में नापा जाता है।

F.P.S पद्धति या ब्रिटिश पद्धति-इस पद्धति में द्रव्यमान, लम्बाई, समय की इकाई क्रमशः पाउण्ड, फुट, सेकण्ड होती है।

S.I. पद्धति :-

  1. यह पद्धति 1960 में अन्तर्राष्ट्रीय माप तौल समिति (International Bureau of Weight and Measures) द्वारा लागू की गयी।
  2. यह पद्धति M.K.S. का. परिवर्तित रूप है।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे अनुमोदित किया गया।
  • ऊपर दी गयी सभी राशियों में आजकल F.P.S. पद्धति का उपयोग सामान्यतः नहीं किया जाता है एवं C.G.S. का उपयोग भी कम किया जाता है। C.G.S. पद्धति में मात्रक छोटे होते हैं। अतः भौतिक राशि का संख्यात्मक मान बहुत अधिक हो जाता है। जिससे गणना में असुविधा होती है।
  • E.P.S. पद्धति में व्युत्पन्न मात्रकों को परस्पर रूपान्तरण करते समय प्राप्त जटिल गुणक एवं उपगुणक असुविधा प्रदान करते है। अतः आजकल M.K.S. तथा S.I. पद्धति का उपयोग किया जाता है।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • (i) विद्युत धारा को मूल राशि लेने पर, इसका मात्रक एम्पियर (A) तब पद्धति MKSA कहलाती है।
  • (ii) आवेश (O) को सम्मिलित करने पर इसका मात्रक कूलॉम तब पद्धति MKSQ कहलाती है।

S.I पद्धति मे सात मूल मात्रक तथा दो पूरक मात्रक होते है। जिन्हें निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है

(A) मूल मात्रक

क्र.सं. भौतिक राशि का नाम मात्रक संकेत (प्रतीक)
1. द्रव्यमान किग्रा kg
2. लम्बाई मीटर m
3. समय सेकण्ड s
4. ताप केल्विन K
5. विद्युत धारा एम्पियर A
6. प्रदीपन तीव्रता केण्डेला Cd
7. पदार्थ की मात्रा मोल mol

(B) पूरक मात्रक

क्र.सं. भौतिक राशि का नाम मात्रक संकेत (प्रतीक)
1. समतल कोण रेडियन rad
2. ठोस कोण या घन कोण स्टेरेडियन sr

S.I. पद्धति की विशेषताएँ (Merits of S.I. System)

  • यह मात्रको की परिमेयकृत पद्धति है अर्थात् इस पद्धति से एक भौतिक राशि के लिए एक ही मात्रक का उपयोग होता है।
  • इस पद्धति में मात्रक अचर तथा उपलब्ध मानकों पर आधारित है।
  • यह मात्रकों की सम्बद्ध पद्धति है अर्थात् इस पद्धति में सभी भौतिक राशियों के व्युत्पन्न मात्रक केवल मूल मात्रकों को गुणा एवं भाग करके प्राप्त हो सकते हैं।
  • ये सभी मात्रक सुपरिभाषित एवं पुनः स्थापित होने वाले है।
  • यह मैट्रिक या दशमलव पद्धति है।
  • S.I. पद्धति विज्ञान की सभी शाखाओं में प्रयोग की जा सकती है परन्तु M.K.S. को केवल यांत्रिकी में प्रयोग किया जा सकता है।

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