राजस्थान की प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाएँ

राजस्थान की प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाएँ

  • आजादी के पश्चात ग्रामीण विकास हेतु केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कई विकास योजनाएँ चलाई जिस में से कुछ असफल रही तो कई योजनाएँ सफल हुईं जिसके कारण गाँवों में आधारभूत ढाँचागत एवं सामाजिक आर्थिक विकास हुआ। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख यहाँ किया जा रहा है :

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(1) महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम (MGNREGP) मनरेगा

  • प्रारम्भ--2 फरवरी, 2006 को आन्ध्रप्रदेश राज्य से हुआ, राजस्थान में इसकी शुरुआत उदयपुर जिले से हुई। प्रथम चरण में राज्य के 6 जिले-उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, सिरोही, झालावाड़, करौली सम्मिलित किये गये जबकि द्वितीय चरण में छः और जिलों को जोड़ा गया। 1 अप्रेल, 2008 से इसे सम्पूर्ण राज्य में लागू किया गया।

(2) स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (S.J.G.S.Y.)

  • प्रारम्भ-1 अप्रैल, 1999 को।
  • उद्देश्य—चयनित बी.पी.एल. परिवारों को साख व अनुदान द्वारा आय अभिवृद्धि करने वाली परिसम्पत्तियाँ उपलब्ध करवाकर उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर उठाना।
  • यह एक केन्द्र प्रवर्तित योजना है जिसमें केन्द्र व राज्य की भागीदारी क्रमश 75 : 25 है।

इस योजना में पूर्व में चल रही निम्न योजनाओं को सम्मिलित किया गया : —

  1. एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (I.R.D.P.)
  2. ग्रामीण युवाओंको स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण योजना (ट्राइसम)
  3. ग्रामीण दस्तकारों को उन्नत औजार किट योजना (सिट्रा)।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में महिला व बाल विकास कार्यक्रम (द्वाकरा)
  5.  गंगा कल्याण योजना (G.K.Y)
  6. दस लाख कुँओं की योजना (M.W.S.)

(3) सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (S.G.R.Y.)

  • प्रारम्भ-जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (J.G.S.Y.) तथा सुनिश्चित रोजगार योजना (E.A.S.) को समायोजित कर केन्द्र सरकार द्वारा इस योजना का शुभारम्भ 1 अप्रेल, 2002 को दिया गया।
  • उद्देश्य:- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध करवाकर खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाने के साथ ही स्थायी परिसम्पत्तियों का निर्माण करना।

(4) जिला गरीबी उन्मूलन परियोजना (D.P.I.P.)

  • प्रारम्भ-25 जुलाई, 2000 (विश्व बैंक के सहयोग से सात जिलों के 42 विकास खण्डों में संचालित)
  • उद्देश्य– राज्य के सात जिलों के 42 ब्लॉकों के ग्रामीण गरीबों को गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से जोड़कर उनकी क्षमताओं का विकास करके उनका सशक्तीकरण करना।

(5) इंदिरा आवास योजना

  • प्रारम्भ– मई, 1985
  • उद्देश्य-SC/ST, मुक्त हुए बंधुओं मजदूरों तथा अन्य बीपीएल ग्रामीण परिवारों के लोगों को एकमुश्त वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर आवास निर्माण करने में मदद करना।
  • वित्त पोषण-– केन्द्र व राज्य की 75 : 25 की भागीदारी से वित्त पोषित।

(6) स्वविवेक जिला विकास योजना

  • प्रारम्भ-2005-06
  • उद्देश्य-जिले के विकास की आवश्यकता एवं आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने व रोजगार के अवसर सृजित करने हेतु जिला कलेक्टर द्वारा जिला स्तर पर स्वविवेक से निर्णय लेकर विकास करवाना।
  • इस योजना में वे कार्य करवाए जाते हैं जो किसी भी योजना में शामिल नहीं हैं तथा उनके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।

(7) गुरु गोलवलकर जनभागीदारी विकास योजना (GGJBY)

  • प्रारम्भ-2004-05
  • उद्देश्य– राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं रोजगार सृजन तथा सामुदायिक परिसम्पत्तियों के निर्माण एवं रखरखाव में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • वित्त पोषण– सामान्य क्षेत्र के अन्तर्गत राज्यांश के रूप में 70 प्रतिशत एवं जन सहयोग के रूप में 30 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में राज्यांश के रूप में 80 प्रतिशत एवं जन सहयोग के रूप में 20 प्रतिशत राशि से वित्त पोषण किया जाता है।

(8) विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MLALAD)

  • प्रारम्भ-1999-2000
  • उद्देश्य– राज्य में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय विधायक की अनुशंसा पर जनोपयोगी कार्यों का निर्माण करवाना।
  • शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित इस योजना में वर्ष 2007-08 से राशि 60 लाख से बढ़ाकर 80 लाख रुपये प्रति वर्ष की गई। वर्तमान में 1 करोड़ रुपये कर दी गई
  • जिला स्तर पर उक्त कार्यक्रम के संचालन हेतु जिला परिषद ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ नोडल एजेन्सी है।

(9) सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MPLAD)

  • प्रारम्भ-1992-93
  • वित्त पोषण-शत-प्रतिशत प्रवर्तित योजना है जो राज्य के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में लागू है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रुपये प्रति सांसद विकास हेतु दिये जाते हैं।

(10) ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार (PURA-Provided Urban of Amenities in Rural Area)

  • प्रारम्भ-15 अगस्त, 2003 को घोषित।
  • उद्देश्य– शहरों के समीप 10-15 गाँवों जिनकी आबादी एक लाख या कम है, में शहरी सीमाएँ उपलब्ध करवाकर भौतिक एवं सामाजिक सविधाओं के अन्तर को कम करना।

(11) दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना

  • प्रारम्भ-वर्ष 2006-07
  • उद्देश्य—आदर्श गाँव का सपना साकार करने हेतु गाँवों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास सहित समग्र विकास करना। इस योजनान्तर्गत प्रथम चरण में 50 ग्राम व द्वितीय चरण में 100 ग्रामों का चयन किया गया। वर्तमान में यह योजना बंद कर दी गई है।

(12) प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY)

  • प्रारम्भ-अप्रेल, 2000
  • उद्देश्य-– केन्द्र सरकार द्वारा 70% राशि ऋण के रूप में व 30% राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
  • वित्त पोषण-ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए आवास की कमी को कम करना।

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