प्राथमिक उपचार ( First Aid )

प्राथमिक उपचार First Aid

  • नमस्कार दोस्तों स्वागत ह आपका examsector.com में। दोस्तों में आपको इस पोस्ट की मदद से प्राथमिक उपचार के बारे में बताऊंगा। कि चोट लगने पर किस प्रकार से प्राथमिक उपचार किया जाता है। जो चिकित्सक से पहले धर पर इलाज किया जाता है उसे प्राथमिक उपचार कहा जाता है। दोस्तों इस प्रकार के नोट्स, पेपर , quiz , gk and अन्य study material के लिए जरूर हमेशा visit करे हमारी website और आपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।
  • कारखानों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों में किसी व्यक्ति के दुर्घटनाग्रस्त या हो जाने पर उसकी चिकित्सकीय जाँच से पहले जो उपचार किया जाता  है। प्राथमिक सहायता (first aid) के रूप में जाना जाता है। प्राथमिक सहायता सुविधा सभी औद्योगिक एवं व्यावसायिक संगठनों में उपलब्ध होनी चाहि क्योंकि चिकित्सकों का हर वक्त वहाँ होना सम्भव नहीं है।

प्राथमिक उपचार के समय ध्यान देने योग्य बातें ( Point to be Remember During First Aid )

  1. प्राथमिक सहायता के अन्तर्गत निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है।
  2. रोगग्रस्त एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को तत्काल अस्पताल ले जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को भीड़ से अलग खुले वातावरण में रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  4. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति या रोगी के कष्ट को कम करने का प्रयास करना चाहिए।
  5. श्वसन क्रिया में कठिनाई उत्पन्न होने की दशा में कृत्रिम श्वसन की व्यवस्था होनी चाहिए।
  6. क्षतिग्रस्त एवं रोगग्रस्त शरीर के भागों पर पट्टी करनी चाहिए।
  7. व्यक्ति का शरीर ठण्डा होने की दशा में उसे गर्म पेय पदार्थ देकर गर्मी उत्पन्न करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
  8.  यदि दुर्घटना के फलस्वरूप रोगी की हड्डी क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसस देने हेतु लकड़ी की खपच्चियों का प्रयोग करना चाहिए।
  9. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की दशा को स्थिर बनाए रखने के लिए पर्याप्त प्रा उपचार किया जाना चाहिए।
  10. दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति से सहानुभूति का भाव रखना चाहिए एंव उस समय-समय पर धैर्य बँधाना चाहिए।

कार्यस्थल पर घायल तथा बीमार की देखभाल ( Care of Injured and Sick at Workplace )

किसी भी नियोक्ता (employer) का यह दायित्व है कि वह कार्य के दौरान आपको सुरक्षित कार्य परिवेश दे और प्रभावित करने वाले स्वास्थ्य एवं सुरक्षा  मुद्दों से आपको अवगत कराए। यदि आप कार्यस्थल पर दुघर्टनाग्रस्त हो जाते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपकी चोट दुर्घटना पुस्तिका में दर्ज कर ली गई है। यदि कार्यस्थल पर कार्य के दौरान कोई स्वास्थ्य या सुरक्षा सम्बन्धी समस्या है, तो नियोक्ता या फिर स्वास्थ्य प्रतिनिधि को अवगत कराएं व उससे समस्या को सुलझाने का आग्रह करें। इसके अतिरिक्त कार्यस्थलों पर प्राथमिक चिकित्सा किट, चिकित्सा कक्ष तथा स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना भी की जानी चाहिए, जिसमें निम्न उपचारों की यवस्था होनी चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा किट

इसमें मांसपेशियों में खिंचाव, कटना, जलना, हड्डी टूटना, आँखों में चोट लगना, बिजली का झटका लगना आदि के उपचार की व्यवस्था तथा आइपैड की आवश्यकता होती है।

प्राथमिक चिकित्सा कक्ष

कार्यस्थलों पर जहाँ कम जोखिम वाले 200 से अधिक या अधिक जोखिम वाले 100 या अधिक श्रमिक कार्यरत हों, वहाँ प्राथमिक चिकित्सा कक्ष की व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की व्यवस्था भी आसानी से होनी चाहिए।

स्वास्थ्य केन्द्र

कार्यस्थल के नजदीक या बड़े कारखानों व खदानों से दूर एक स्वास्थ्य केन्द्र में पर्याप्त आपातकालीन सेवाएँ उपलब्ध होनी चाहिए, जो घटना के तुरन्त बाद उपलब्ध हो सकें।

बीमार व्यक्ति का परिवहन

बीमार श्रमिक या कार्मिक का स्थानान्तरण प्रायः नियोक्ता के द्वारा व्हीलचेयर या स्टेचर की सहायता से किया जाता है। यह स्थानान्तरण सड़क परिवहन (मोटर व्हीकल) या फिर वायु परिवहन (वायुयान या हेलीकॉप्टर) द्वारा किया जाना सम्भव है, जिसमें एम्बुलेंस का काफी महत्त्व होता है, जिसका संचालन सरकारी या निजी अस्पतालों या विभिन्न संगठनों द्वारा किया जाता है। यह उपकरणों से सम्पन्न होती है, जिसे चल-अस्पताल भी कहा जाता है। साथ ही ऐसे में विशेषतः अक्षम रोगी के साथ करियर की व्यवस्था की जाती है, जो रोगी की रास्ते में सेवा-सुश्रुषा करता रहता है। ऐसे व्यक्ति के स्थानान्तरण में करियर की मुख्य भूमिका होती है और रोगी का सहयात्री करियर की सहमति से ही ले जाया जाना सम्भव है। इस पात्र की एक विशेषता यह होती है कि यात्रा के दौरान जा रहा करियर अनुबन्धित होता है।

बीमार व्यक्ति के परिवहन की विधि निम्न है।

  1. कार्मिक के रोग, चोट या फिर अन्य कमजोरी की दशा में सुपरवाइजर तत्काल जाँच करेगा।
  2. कार्मिक की कार्य करने की क्षमता या कार्य करने सम्बन्धी अक्षमता को सुनिश्चित करने के लिए उसके तत्काल अस्पताल, मेडिकल क्लीनिक या उपयुक्त फिजीशियन के ऑफिस में स्थानान्तरण की आवश्यकता होती है।
  3. यदि यह सुनिश्चित होता है कि तत्काल चिकित्सकीय ध्यान दिए जाने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कार्मिक अभी सामान्य रूप से कार्य करने के लायक नहीं है, तो उसके स्थानान्तरण के लिए प्रयुक्त सामान्य साधन से विलग उपयुक्त साधन से उसे घर पहुँचाया जाता है।
  4. जहाँ कार्मिक सुपरवाइजर के कार्य करने सम्बन्धी आकलन से सन्तुष्ट नहीं होता, वहाँ मामले को उपयुक्त रूप में समझने के लिए अन्य सुपरवाइजर को नियुक्त किया जाता है।
  5. कार्मिक के स्थानान्तरण में सुपरवाइजर ही मुख्य होता है, जो सम्पूर्ण प्रक्रिया को सम्पन्न करता है। इस प्रकार दुर्घटनाओं के विविध कारकों को जानकर उनके निवारक उपायों (Preventive Measures) से अवगत हुआ जा सकना सम्भव है और उनका उपयुक्त तरीकों से सदुपयोग करके दुर्घटनाओं पर प्रभावी रूप से नियन्त्रण किया जा सकना सम्भव होता है।

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