अभिप्रेरणात्मक से तात्पर्य (Meaning of Motivation)

अभिप्रेरणात्मक से तात्पर्य Meaning of Motivation

  • अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु किसी को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया अभिप्रेरण (Motivation) कहलाती है।
  • नमस्कार दोस्तो आप सभी का स्वागत है Examsector.Com में। दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से में आपको अभिप्रेरण से तात्पर्य Meaning of Motivation तथा अपने आप से किस प्रकार motivation होते है इन सब के बारे में इस पोस्ट की मदद से में आपको बताऊंगा। कि अभिप्रेरण से तात्पर्य Meaning of Motivation क्या है। तथा motivation क्या होता है और यह क्यों जरुरी है इंसान के लिए। तथा motivation के कितने प्रकार है और आपने आप से किस प्रकार motivation हुआ जाता है इन सब के बारे में इस पोस्ट की मदद से बताया जायगा।

स्टेनर के अनुसार :-

  • “मोटिव (Motive) एक आन्तरिक अवस्था है, जो आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा का संचार करती है तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए स्वभाव को भी निर्देशित करती है।”

अभिप्रेरण के प्रकार Types of Motivation

अभिप्रेरण को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है।

  1. आन्तरिक अभिप्रेरण
  2. बाह्य अभिप्रेरण

1. आन्तरिक अभिप्रेरण (Internal Motivation)

  1. आन्तरिक अभिप्रेरण उस अभिप्रेरण को कहते हैं, जिसमें व्यक्ति किसी कार्य में स्वयं रुचि या आनन्द लेता है। आन्तरिक अभिप्रेरण का अध्ययन वर्ष 1970 के प्रारम्भ में किया गया था। वे व्यक्ति जो आन्तरिक रूप से स्वयं अभिप्ररित रहते हैं वे अपने कौशलों को सुधारने के लिए स्वयं की इच्छा से अपने कार्य में संलग्न रहते है। इस प्रक्रिया से उनके कौशल तथा मनन क्षमताओं से काफी वृद्धि होती हैं।

2. बाह्य अभिप्रेरण (External Motivation)

  • बाह्य अभिप्रेरण व्यक्ति के बाहर से आता है। सामान्यतः बाह्य अभिप्रेरण में प्रतिस्पर्धा होती है क्योंकि यह निष्पादक को जीतने र हराने के लिए प्रोत्साहित करता है।

स्वयं को अभिप्रेरित करने के तरीके Ways to Motivate Oneself

  • स्वयं को अभिप्रेरित करने के तरीके निम्न प्रकार हैं।

(i) कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करें (Works Divided in Small Parts)

  • जब भी आप किसी बहुत बड़े कार्य को करने जा रहे हैं, तो सबसे पहले उस कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करें और सरल वाले कार्य पर ध्यान केन्द्रित करें। उसके बाद उससे मुश्किल और बड़े कार्य को करें। इस तरह छोटी-छोटी सफलताओं से स्वयं को अभिप्रेरित महसूस करेंगे।

(ii) अपनी सफलताओं को याद रखें (Always Remember Own Achievement)

  • जब भी आप स्वयं को कमजोर मान रहे हों, तो अपनी विफलताओं को छोड़कर सफलताओं को याद करें तथा उन्हें कागज पर लिखें। जीवन में आनन्द प्राप्त करने हेतु कार्य सन्तुष्टि होना आवश्यक है।

(iii) मुश्किल कार्य पहले करें (Difficult Work do First)

  • इससे आपके दिन-प्रतिदिन की चिन्ता अवश्य घट जाएगी और आप स्वयं को आत्मविश्वास से भरा हुआ पाएँगे।

(iv) स्वयं की तुलना स्वयं से करें दूसरों से नहीं (Self Compare by Self Non Other than)

  • लोग अपनी तुलना दूसरे लोगों से करते हैं। और हीन भावना से ग्रस्त होकर अभिप्रेरणा को खत्म कर देते हैं। स्वयं की तुलना स्वयं से कीजिए। आप ने कल जो कार्य किया, उसे आज कितने बेहतर ढंग से किया या कर सकते हैं।

(v) कार्य को धीरे से प्रारम्भ करें (Works Start Slowly)

  • किसी कार्य को बहुत जोश से प्रारम्भ करने से अच्छा है उस कार्य को धीमी गति से प्रारम्भ करें।

(vi) समय प्रबन्धन उचित रूप से करें (Appropriately Time Management)

  • स्वयं को अभिप्रेरित करने के लिए समय प्रबन्धन आवश्यक है क्योंकि समय को एकत्र करके नहीं रखा जा सकता। यदि किसी लक्ष्य को पूरा करने का समय एक बार निकल जाता है तो उस लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन हो जाता है। इसलिए समय का उचित उपयोग अभिप्रेरण के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। सफल व्यक्ति समय को कीमती संसाधन की तरह प्रयोग करते है। समय प्रबन्धन किसी भी कार्य को प्रभावी एवं दक्षतापूर्वक करने में सहायता करता हैं और यह जीवन में विभिन्न पहलुओं में संतुलित करने में भी सहायता करता है।

(vii) विफलताओं से घबराएँ नहीं (Not Confused from Failure)

  • स्वयं को विफलताओं के डर से रोके नहीं। अपितु इन विफलताओं से सीख लें। ये सीख लक्ष्य को प्राप्त करने एवं स्वयं को अभिप्रेरित करने में सहायक सिद्ध होती है।

(viii) आत्मविश्वास बढ़ाएँ (Confidence Building)

  • आत्मविश्वास से तात्पर्य है। किसी व्यक्ति को स्वयं पर किसी कार्य को सम्पन्न करने की शक्ति/योग्यता के अनुभूति होने से है अर्थात् किसी व्यक्ति विशेष को किसी कार्य को पूरा करने के स्वयं पर भरोसा से है। आत्मविश्वास स्वयं को अभिप्रेरित करने का प्रमुख
    साधन है।

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