राजस्थान का राष्ट्रीय उद्यान

National Parks of Rajasthan ( राजस्थान का राष्ट्रीय उद्यान )

rajasthan ke rashtriya udyan ( राजस्थान का राष्ट्रीय उद्यान )

1. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (सवाई माधोपुर)

  • ‘Land of Tiger’ के नाम से प्रसिद्ध यह राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर जिले के 392 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में विस्तृत है।
  • राज्य के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान रणथम्भौर की स्थापना वर्ष 1955 में एक अभयारण्य के रूप में की गई, जिसे 1980 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।
  • यहाँ पर भारत सरकार द्वारा बाघ परियोजना 1973-74 में प्रारम्भ की गई। (विश्व वन्य जीव कोष के सहयोग से)
  • यहाँ के प्रमुख आकर्षण बाघ, मगरमच्छ, सांभर, जंगली सूअर, चिंकारा, मच्छीखोरा एवं काला गरुड़ हैं।
  • उद्यान में रणथम्भौर दुर्ग, त्रिनेत्र गणेश मंदिर एवं जोगी महल स्थित है।
  • राज्य सरकार ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा है।
  • उद्यान में पदम तालाब, मलिक तालाब, राजबाग, गिलाई सागर, मानसरोवर एवं लाहपुर नामक छ: झीलें स्थित हैं।
  • यहाँ 10 करोड़ की लागत से क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय खोला जायेगा।
  • यहाँ पर विश्व बैंक की सहायता से वर्ष 1996-97 में इण्डिया ईको डवलपमेन्ट प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया गया।
  • यहाँ पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए टाइगर सफारी पार्क बनाया जायेगा।
  • 2005 की बाघ गणना के अनुसार यहाँ 26 बाघ हैं। इनकी संख्या 2004 में 47 बताई गई थी। रणथंभौर में बाघों की घटती संख्या की जाँच हेतु केन्द्रीय स्तर पर टॉस्क फोर्स का गठन सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुनिता नारायण की अध्यक्षता में किया गया। राज्य सरकार ने सांसद लो.पी. सिंह की अध्यक्षता में अलग टॉस्क फोर्स गठित की।
  • रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान की ‘मछली’ नामक बाघिन को ब्रिटेन की ट्रेवल ऑपरेटर फॉर टाइगर्स नामक संस्था ने लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

2. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर)

  • यह उद्यान नेशनल हाईवे-11 पर भरतपुर के निकट 29 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है।
  • इस उद्यान की स्थापना 1956 में की गई, जिसे 1981 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।
  • वर्ष 2004 में इसे रामसर साईट की सूची में सम्मिलित किया गया।
  • यूनेस्को द्वारा 1985 में विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाला यह राज्य का एकमात्र वन्य जीव संरक्षण स्थल है। इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर के अन्तर्गत प्राकृतिक धरोहर की सूची में स्थान मिला।
  • आस्ट्रिया की सहायता से यहाँ पर ‘पक्षी व नमभूमि चेतना केन्द्र’ स्थापित किया गया है।
  • यहाँ पर लगभग 390 प्रकार के पक्षी मिलते हैं।
  • शीतकाल में यहाँ साइबेरियन सारस, गीज, व्हाईट स्टार्क, बीजंस, मैलाड, मेडवल, शावर्ल्स, टील्स, पीपीटस एवं लैपवीर नामक विदेशी पक्षी साइबेरिया एवं उत्तरी यूरोप से आते हैं।
  • यहाँ मुख्यतः धोक, कदम्ब, बैर, खजूर और बबूल के पेड़ पाए जाते हैं।
  • पक्षियों की स्थानीय प्रजातियों में काल्प, बुजा, अंधल, अंधा बगुला, पीहो, भारतीय सारस एवं कठफोड़वा प्रमुख हैं।
  • यहाँ चीतल, सांभर, जरख, गीदड़, जंगली बिल्ली, सियार आदि वन्य जीव मिलते हैं।
  • उद्यान में अजान बांध’ स्थित है, इसके निकट पाइथन पाइंट पर __ अजगर (पाइथन) देखे जा सकते हैं। अजान बांध से यहाँ जलापूर्ति
    की जाती है।
  • बार हेडेड ग्रीज पक्षी-रोजी पिस्टर (चिल्लाने वाले) एवं वाल्मीकि द्वारा बताये गये चकवा-चकवी भी यहाँ मिलते हैं।
  • यह राष्ट्रीय उद्यान प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सलीम अली की कर्मस्थली रहा है। पक्षियों की प्रजातियों पर अपनी पुस्तक ‘स्पीशीज’ उन्होंने यहाँ लिखी थी। यहाँ डॉ. सलीम अली इंटरप्रिटेशन सेंटर को आस्ट्रियन सॉरोस्की की आर्थिक मदद और वर्ल्ड वाइड फण्ड के निर्देशन में एक केन्द्र की स्थापना हुई है।

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