राजस्थान का अरावली पर्वतीय प्रदेश

Rajasthan ka aravali parvatiya pradesh

Rajasthan ka aravali parvatiya pradesh |

राजस्थान का अरावली पर्वतीय प्रदेश

अरावली पर्वतीय प्रदेश

  • अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमाला है, जो कालान्तर में घर्षण से वर्तमान में अवशिष्ट रूप में रह गई है।
  • इस पर्वतमाला का निर्माण आज से लगभग 60 करोड़ वर्ष पूर्व कैम्ब्रियन युग में हुआ माना जाता है।
  • यह प्रदेश 50 सेमी. की वर्षा रेखा द्वारा मरुस्थलीय क्षेत्र से अलग होता है।
  • अरावली का विस्तार गुजरात के खेड़ब्रह्मा (पालनपुर) से दिल्ली तक कुल 692 किमी. है। दिल्ली में इसे रायसीना की पहाड़ियाँ कहा जाता है। (राष्ट्रपति भवन के निकट)
  • राजस्थान में अरावली की अधिकतम लंबाई 550 कि.मी. है।
  • यह पर्वतमाला सिंधु व गंगा नदी तंत्र के मध्य जल विभाजक का कार्य करती है।
  • राज्य में अरावली पर्वतमाला की अवस्थिति दक्षिण-पश्चिम से उ.पू. दिशा की ओर है। इसकी तुलना उत्तरी अमेरिका के अप्लेशियन पर्वत से की जा सकती है।
  • यह पर्वतमाला सांभर झील के पश्चिम से गुजरती है। इस पर्वतमाला की गहरी नदियों की घाटियाँ प्रौढ़ावस्था प्राप्त कर चुकी हैं।
  • भूगर्भिक दृष्टि से अरावली श्रेणी क्वार्टजाईट व ग्रेनाइट चट्टानों से बनी हैं। यह गौंडवाना लैण्ड का अवशेष है।

गुरु शिखर

अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरुशिखर (1,722 मी.) है, जिसे गुरु दत्तात्रेय की तपोस्थली माना जाता है। इस शिखर को कर्नल जेम्स टॉड ने ‘सन्तों का शिखर’ कहा है। यह हिमालय व नीलगिरी के मध्य स्थित सर्वोच्च पर्वत चोटी है। इस चोटी के नीचे पश्चिम की ओर राजस्थान का सबसे ऊँचा ‘उडिया का पठार’ स्थित है।
अरावली पर्वतमाला के दोनों ओर 50 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा रेखा है जो इसे पश्चिमी रेतीले मैदान एवं पूर्वी मैदान से अलग करती है। अरावली पश्चिमी मरुस्थल को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है।

अरावली क्षेत्र को चार भागों में बाँटा जा सकता है—उत्तरी पूर्वी पहाड़ी प्रदेश, मध्य अरावली प्रदेश, मेवाड़ पहाड़ियाँ एवं भोराट का पठार तथा आबू पर्वत खण्ड।

(i) उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र

  • इस क्षेत्र में अलवर एवं जयपुर जिलों में विस्तृत अरावली पर्वतमाला को सम्मिलित किया जाता है। इन पहाड़ियों की शाखाएँ सीकर जिले के नीम का थाना एवं श्रीमाधोपुर तक तथा झुंझुनूं जिले के खेतड़ी तक चली गई हैं।
  • इस क्षेत्र की सर्वोच्च पर्वत चोटी रघुनाथगढ़ (1055 मी.) सीकर जिले में स्थित हैं। अलवर जिले में भैंराच एवं बैराठ तथा जयपुर जिले में खोह एवं बाबाई यहाँ की अन्य महत्त्वपूर्ण पर्वत चोटियाँ हैं।

(ii) मध्य अरावली प्रदेश

  •  इस क्षेत्र में अजमेर जिले एवं सांभर (जयपुर) क्षेत्र की अरावली पर्वतमाला को सम्मिलित किया जाता है। इस क्षेत्र की प्रमुख पहाड़ियाँ सांभर की पहाड़ियाँ, मेरवाड़ा की पहाड़ियाँ, कुकरा की पहाड़ियाँ (अजमेर, राजसमंद) हैं।
  • मेरवाड़ा की पहाड़ियाँ जो मारवाड़ के मैदान को मेवाड़ के पठार से अलग करती हैं, अजमेर जिले के अधिकांश भाग, राजसमंद के उत्तरी भाग एवं पाली जिले के बर क्षेत्र में विस्तृत हैं।
  • इन पहाड़ियों में स्थित प्रमुख दर्रे हैं—बर, खामली घाट एवं गोरमघाट।
  • इन पहाड़ियों का सर्वोच्च शिखर तारागढ़ (873 मी.) अजमेर के निकट स्थित है।
  • अजमेर शहर के पश्चिम में नाग पहाड़ स्थित है, जहाँ से लूनी नदी निकलती है।
  • मेरवाड़ा की पहाड़ियों का दक्षिणी छोर ‘कुकरा की पहाड़ियाँ कहलाता है, जो मेरवाड़ा की पहाड़ियों को मेवाड़ की पहाड़ियों से जोड़ती है।
  • बर दर्रा—यह दर्रा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 14 पर पाली जिले में स्थित है जो ब्यावर को बर से जोड़ता है। ब्यावर की ओर जयपुर, कोटा एवं अजमेर नगर स्थित हैं जबकि बर की ओर जोधपुर, पाली एवं सिरोही नगर स्थित हैं।
  • गोरमघाट एवं खामली घाट दर्रे-राजसमन्द जिले में जोधपुरउदयपुर रेलमार्ग पर स्थित हैं। प्रत्यक्षतः ये दर्रे मारवाड़ जंक्शन (पाली) को आमेट (राजसमन्द) से जोड़ते हैं।
  • सांभर-सिंघाना श्रेणी सांभर से प्रारम्भ होकर हर्ष पर्वत (सीकर) होते हुए सिंघाना (झुंझुनूं) तक चली गई हैं जो कि मध्य अरावली का ही विस्तार है।

(iii) मेवाड़ की पहाड़ियाँ एवं भोराट का पठार

  • मेवाड़ पहाड़ियाँ एवं भोराट के पठार का विस्तार उदयपुर, राजसमन्द, पाली, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ एवं डूंगरपुर जिलो में है।
  • मेवाड़ की पहाड़ियाँ अपनी समृद्ध वन सम्पदा एवं विविध खनिजो के लिए प्रसिद्ध है।
  • उदयपुर नगर के चारों ओर विस्तृत तश्तरीनुमा पहाड़ियों को स्थानीय भाषा में गिरवा (गिर्वा) कहते हैं।
  • कुंभलगढ़ (राजसमन्द) से गोगुन्दा (उदयपुर) के मध्य स्थित भोराट का पठार औसत 600 मीटर ऊँचा है।
  • पीडमान्ट मैदान-अरावली पर्वत श्रेणी में देवगढ़ (राजसमंद) के समीप स्थित पृथक निर्जन पहाड़ियों का ऊँचे : भू-भाग।
  • मेवाड़ की पहाड़ियों में दो प्रमुख दर्रे स्थित हैंदेसूरी नाल एवं हाथी गुड़ा की नाल दर्रा । देसूरी नाल देसूरी (पाली) को चारभुजा (राजसमंद) से जोड़ता है जबकि हाथी गुडा की नाल दर्रा सिरोही को गोगुन्दा (उदयपुर) से जोड़ता है (NH – 76)।
  • केलवा की नाल, जीलवाडा नाल, सोमेश्वर नाल, आदि अन्य पे भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
  • इस क्षेत्र की प्रमुख पर्वत चोटियाँ जरगा, रागा, सायरा एवं गोगुन्दा (सभी उदयपुर में) हैं।
  • बीजासण का पठार (मांडलगढ़) भीलवाड़ा जिले में स्थित है।
  • पूर्वी सिरोही में कम ऊँचाई वाली ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों को ‘भाकर’ कहते हैं।
  • मगरा–उदयपुर के उत्तर-पश्चिम में स्थित कम ऊँची पहाड़ियाँ । जयसमन्द झील से पूर्व में लसाड़िया का पठार’ विस्तृत है, जो कटा-फटा व विच्छेदित है।

(4) आबू पर्वत क्षेत्र

  • यह अरावली पर्वतमाला का सबसे ऊँचा क्षेत्र है जो सिरोही जिले के दक्षिणी भाग में स्थित है।
  • आबू पर्वत लगभग 19 किमी. लम्बा, 8 किमी. चौड़ा एवं 1200 मी. औसत ऊँचा है। गुरुशिखर, सेर एवं अचलगढ़ यहाँ का प्रमुख पर्वत चोटियाँ हैं।
  • आबू पर्वत पर राज्य का सबसे ऊँचा नगर ‘माउण्ट आबू’ स्थित है। (ऊँचाई 1200 मी.)
  • अरावली पर्वतमाला के आबू पर्वत से इसकी एक शाखा जसवन्तपुरा, जालोर, मोकलसर, सिवाना होते हुए नाकाई (बाड़मेर) तक चली गई है।

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