राजस्थान के उतर पश्चिमी रेतीला मैदान

राजस्थान के भौतिक या भौगोलिक प्रदेश ( Rajasthaan ke bhautik pradesh )

  • राजस्थान के भौतिक प्रदेशों में सर्वप्रथम अरावली का निर्माण या उद्भव हुआ। इसके बाद क्रमशः दक्षिण-पूर्वी पठार एवं पूर्वी मैदान अस्तित्व में आए। सबसे अन्त में पश्चिमी रेतीले मैदान (थार का मरुस्थल) का निर्माण हुआ।
  • धरातल एवं जलवायु के अंतरों के आधार पर राजस्थान को चार भागों में बाँटा जा सकता है।
  1. उतर पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
  2. मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश
  3. पूर्वी मैदानी प्रदेश
  4. दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश

New Doc 2020 09 15 10.50.48 3

उतर पश्चिमी रेतीला मैदान

  • इस मैदान (मरुस्थल एवं अर्द्ध-मरुस्थल) की उत्पत्ति टेथिस सागर से हुई मानी जाती है। वर्तमान में राजस्थान की खारे पानी की झीलें टेथिस सागर के अवशेष हैं।
  • अरावली के उत्तर-पश्चिम में विस्तृत यह मैदान थार के रेगिस्तान का पूर्वी भाग है। इस मैदान की अधिकतम लम्बाई 640 किमी. एवं अधिकतम चौड़ाई 300 किमी. है।
  • मैदान की पूर्वी सीमा 50 सेमी. की वार्षिक वर्षा रेखा है।
  • पश्चिमी रेतीले मैदान में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, पाली, सीकर एवं झुंझुनूं कुल 12 जिले एवं सिरोही जिले का उत्तरी-पश्चिमी भाग सम्मिलित है।
  • इस क्षेत्र की प्रमुख घासे सेवण एवं धामण हैं जो मुख्यतः जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, नागौर एवं जालौर जिलों में मिलती हैं।
  • इस मैदान का सबसे बड़ा नगर जोधपुर है। अन्य महत्त्वपूर्ण नगर श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़, पाली, बालोतरा, नागौर, चूरू, सीकर एवं झुंझुनूं हैं।
  • धरियन-जैसलमेर जिले के जनशून्य क्षेत्रों में स्थानान्तरित बालूका स्तूपों को स्थानीय भाषा में ‘धरियन’ कहते हैं।
  • मरुस्थल के प्रकार—(1) इर्ग-रेतीला मरुस्थल (2) हम्माद – पथरीला मरुस्थल (3) रैग-मिश्रित मरुस्थल
  • पश्चिमी रेतीले मरुस्थल का लगभग 60% भाग रेतीले बालूका स्तूपों से आवृत्त है।
  • यहाँ पर तीन प्रकार के बालू के स्तूप पाये जाते हैं—पवनानुवर्ती (अनुदैर्ध्य), अनुप्रस्थ एवं बरखान (अर्द्धचन्द्राकार)

(i) अनुदैर्ध्य बालुकास्तूप-मरुस्थल के दक्षिणी एवं पश्चिमी भागों विशेषकर बाड़मेर, जैसलमेर एवं जोधपुर जिलों में विस्तृत हैं। ये स्तूप वायु की दिशा के समानान्तर लम्बाकार रूप में बनते हैं।
(ii) अनुप्रस्थ बालुकास्तूप-मरुस्थल के उत्तरी एवं उत्तरी पूर्वी भागों में व्याप्त हैं। ये पवनों की दिशा के समकोण में बनते
(ii) बरखान अथवा अर्द्धचन्द्राकार बालुकास्तूप मरुस्थली के उत्तरी भागों विशेषकर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर एवं चूरू जिलों में शृंखलाबद्ध रूप में मिलते हैं।

  • यह राजस्थान में समुद्र तल से सबसे कम औसत ऊँचाई (150 मी.) वाला भाग है।
  • इस क्षेत्र में वर्षाकाल में बनने वाली छोटी प्लाया झीलों को स्थानीय भाषा में ‘रन’ या ‘टाट’ कहते हैं। ऐसी कुछ प्लाया झीलें हैं—कनोड़, बरमसर, भाकरी, बाप (जोधपुर) एवं थोब (बाड़मेर)।
  • इस प्रदेश के अवसादी शैल समूह में भूमिगत जल का अच्छा उदाहरण ‘लाठी सीरीज’ (जैसलमेर) में मिलता है।
  • थार मरुस्थल स्थानीय भाषा में ‘थली’ के नाम से भी जाना जाता है, जो ‘ग्रेट पेलियोआर्कटिक अफ्रीकी मरुस्थल’ का पूर्वी भाग है। सम्पूर्ण थार मरुस्थल का 62% भाग राजस्थान में है।
  • इस क्षेत्र का सामान्य ढाल पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की तरफ है। भूगर्भ शास्त्रियों के अनुसार इस प्रदेश में इयोसीनप्लीस्टोसीन काल में समुद्र विस्तृत था।
  • थार का मरुस्थल पूर्व के ‘टेथिस सागर’ का अवशेष है। जो सरस्वती व अन्य नदियों द्वारा तलछट से भर दिया गया। टेथिस सागर के अवशेष के रूप में यहाँ की नमकीन झीलें रैवासा, कोछौर, कुचामन, पचपदरा, डीडवाना, लूणकरणसर, सांभर आदि मौजूद हैं।
    पश्चिमी रेतीले मैदान को दो भागों में बाँटा जाता है— (इन भागों को 25 सेमी की वर्षा रेखा पृथक करती है।)
    (1) महान भारतीय मरुभूमि
    (2) राजस्थान बांगर

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