राजस्थान के प्रमुख मुस्लिम त्योहार

rajasthan ke pramukh muslim tyohar

राजस्थान के प्रमुख मुस्लिम त्योहार

rajasthan ke pramukh muslim tyohar

मुस्लिम महीने

  • 1. मोहर्रम, 2. सफर, 3. रवि-उल-अव्वल, 4. रवि-उलसानी, 5. जमादि-उल-अव्वल, 6. जमादि-उल-सानी, 7. रज्जब, 8. सावान, 9. रमजान, 10. शव्वाल, 11. जिल्काद, 12. जिलहिज
  • मोहर्रम – मुसलमानों के हिजरी सन् का पहला महीना। मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की कर्बला के मैदान में शहादत की याद में मोहर्रम का त्योहार मनाया जाता है, इस दिन ताजिये निकाले जाते हैं।
  • बारावफात (ईद-उल-मिलादुल्लनबी) – पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्म (570 ई. को मक्का में) की याद में रबी-उल-अव्वल माह की 12वीं तारीख को मनाया जाता है।
  • मीठी ईद (ईद-उल-फितर)-सिवैयों की ईद, रमजान महीने में 30 रोजे की समाप्ति के बाद शव्वाल माह की पहली तारीख को मनाते हैं।
  • बकरा ईद (ईदुलजुहा) — यह कुर्बानी का त्यौहार है, मुसलमान इसी माह में हज करते हैं। यह जिलहिज माह की दसवीं तारीख को मनाते हैं। पैगम्बर हजरत इब्राहिम द्वारा अपने लड़के हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने की याद में मनाया जाता है।
  • शबे बारात — इसे शाबान माह की 14वीं तारीख को मनाते हैं। इस दिन मुहम्मद साहब की आकाश में अल्लाह से मुलाकात हुई थी। इस दिन मुसलमान भाई अपनी भूलों व पापों की माफी के लिए खुदा से प्रार्थना करते हैं।
  • शबे कद्र-यह रमजान माह की 27वीं तारीख को मनाया जाता है। इस दिन कुरान उतारी गई थी।
  • चेहल्लुम-सफर माह की 20वीं तारीख को मनाते हैं।

राजस्थान में भरने वाले प्रमुख उर्स

  • उर्स गरीब नवाज़, अजमेर – साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रतीक संजर (ईरान) में जन्मे ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु के पश्चात मांडू के सुल्तान गयासुद्दीन अजमेर में उनकी पक्की मजार का निर्माण करवाया, जहाँ ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु की बरसी के रूप में रज्जब माह की 1 से 6 तारीख तक उर्स भरता है।
  • गलियाकोट का उर्स, डूंगरपुर – माही नदी के किनारे दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय के प्रमुख तीर्थ गलियाकोट में प्रतिवर्ष उर्स भरता है। (फखरुद्दीन पीर की मज़ार)
  • तारकीन का उर्स, नागौर – नागौर में सूफियों की चिश्ती शाखा के संत काजी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह पर उर्स भरता है। यह उर्स अजमेर के ख्वाजा साहब के उर्स के बाद राज्य में सबसे बड़ा उर्स है।
  • नरहड़ की दरगाह का उर्स, झुंझुनूं – शक्कर पीर बाबा (बांगड़ ____ के धणी) की दरगाह (नरहड़) पर कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशाल मेला भरता है। जायरीन दरगाह में स्थित जाल वृक्ष पर अपनी मिन्नतों के डोरे बाँधते हैं। पागलपन के असाध्य रोगी भी यहाँ ठीक हो जाते हैं, ऐसा माना जाता है।

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