राजस्थान की मस्जिदें, मकबरे व मीनारें

rajasthan ki pramukh masjid makbare

राजस्थान की मस्जिदें, मकबरे, मीनारें व गुम्बज

rajasthan ki pramukh masjid makbare

मोइनदुद्दीन चिश्ती की दरगाह-अजमेर

  • हजरत शेख उस्मान हारून के शिष्य ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1135 ई. (14वीं रज्जब) को संजर (ईरान) में हुआ। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के पिता का नाम हजरत ख्वाजा गयासुद्दीन व माता का नाम बीबी साहेनूर था। इनका बचपन खुरासान में बीता। ये पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में भारत में आये व गुम्बजअजमेर को अपना कार्यक्षेत्र बनाया।
  • 1233 ई. में उनकी इंतकाल के बाद 1464 ई. में माण्डू के सुल्तान गयासुद्दीन ने पक्की मजार व उस पर गुम्बज बनवाया। इन्होंने ही मुख्य प्रवेश द्वार पर बुलंद दरवाजा बनवाया, जो ‘दरगाह की सबसे प्राचीन इमारत’ है।
  • साम्प्रदायिक सद्भाव का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता, राजस्थान का सबसे बड़ा ख्वाजा साहब का उर्स रज्जब माह की पहली से छठी तारीख तक भरता है।
  • दरगाह परिसर में दो देग हैं। बड़ी देग का निर्माण अकबर ने व छोटी देग का निर्माण बादशाह जहाँगीर ने करवाया । यहाँ निजाम द्वार का निर्माण हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली द्वारा करवाया।
  • होली बायोग्राफी–मिर्जा वहीउद्दीन बेग द्वारा लिखित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की जीवनी।
  • ढाई दिन का झोपड़ा — अजमेर ।
  • चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) द्वारा निर्मित संस्कृत पाठशाला जिसे तोड़कर मोहम्मद गौरी के निर्देश पर सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने मस्जिद बनाई जिसे इल्तुतमिश ने पूर्ण करवाया।
  • हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य कला का अनठा उदाहरण पेश करती इस मस्जिद में पंजाब शाह का उर्स भरता है।

हमीदुद्दीन नागौरी (तारकीन) की दरगाह- नागौर

  • हम्मद गोरी के साथ भारत आये सुरावर्दी सम्प्रदाय के सूफी संत काजी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह नागौर शहर में गिनाणी तालाब के किनारे स्थित है। इस दरगाह पर ख्वाजा साहब के उर्स के बाद दूसरा बड़ा उर्स भरता है।

सैफुद्दीन अब्दुल बहाव (बड़े पीर) की दरगाह-नागौर

  • सूफी मत की कादरिया शाखा के प्रवर्तक सैयद सैफुद्दीन अब्दुल बहाव की यह दरगाह कादरिया सम्प्रदाय की सबसे बड़ी दरगाह है।

नरहड़ शरीफ (शक्कर बाबा) की दरगाह झंझनँ

  • नरहड़ कस्बे में बांगड़ के धणी नरहड़ पीर (शक्कर पीर बाबा) की दरगाह स्थित है। यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) को विशल मेला भरता है।

फखरूद्दीन नागौरी की दरगाह-गलियाकोट (डूंगरपुर)

  • दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल जहाँ प्रतिवर्ष मेला भरता है।

अन्य महत्त्वपूर्ण मस्जिदें, मकबरे, मीनारें व गुम्बज

  • फखरुद्दीन चिश्ती की दरगाह—सरवाड़ (अजमेर)
  • अब्बन शाह अल्लेही!हमा (हजरत मखदून पीर) की दरगाह पीर की जाल, सांचोर (जालोर)
  • कमरुद्दीन की दरगाह झुंझुनूं
  • इकमीनार मस्जिद-जोधपुर
  • गुलाब खाँ का मकबरा—जोधपुर
  • गमता गाजी-जोधपुर
  • गुलाम कलंदर-जोधपुर
  • तना पीर की दरगाह मण्डोर (जोधपुर)
  • अलाऊद्दीन की दरगाह—जालोर ।
  • मलिकशाह पीर की दरगाह—जालोर (दुर्ग)
  • पीर दुल्लेशाह की दरगाह—केरला (पाली)
  • खुदाबख्श की दरगाह—सादड़ी (पाली)
  • मस्तान बाबा की दरगाह—पाली
  • मीठे शाह की दरगाह-गागरोन (झालावाड़)
  • ईदगाह-जयपुर
  • नालीसर मस्जिद सांभर (जयपुर)
  • अलीशाह पीर की दरगाह-दूदू (जयपुर)
  • उषा मस्जिद-बयाना (भरतपुर)
  • मर्दान शाह की दरगाह-सवाई माधोपुर
  • सैय्यद बादशाह की दरगाह-शिवगंज (सिरोही)

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