VoIP (Voice over Internet Protocol)

 VoIP (Voice over Internet Protocol) तकनीक(VoIP Technique)

नमस्कार दोस्तों –
दोस्तों आप सब का स्वागत है examsector.com में। दोस्तों आज में इस पोस्ट के माध्यम से आपको VoIP (Voice over Internet Protocol) के बारे में बताऊंगा। कि VoIP (Voice over Internet Protocol) क्या होता है। तथा VoIP (Voice over Internet Protocol) का उपयोग कहा किया जाता है। VoIP (Voice over Internet Protocol) के माध्यम से पूरी दुनिया एक – दूसरे से जुडी है। पुरे world का VoIP (Voice over Internet Protocol) system टेलीफ़ोन communication VoIP (Voice over Internet Protocol) पर ही टिका है इसके माध्यम से लोग दुनिया के किसी जगह से video और voice call से आसानी से बात कर लेते है।
हालाँकि सूचना तकनीक की दुनिया में इण्टरनेट टेलीफोनी अब कोई नई चीज़ नहीं रही और भारत में इसे कानूनी मान्यता मिले बहुत साल हो गए हैं, इसके बावजूद इसके कार्य करने की प्रक्रिया को बहुत से लोग नहीं समझते हैं इसलिए इस प्रक्रिया पर एक नजर डाल लेना उचित होगा, तो पहले यह देखें कि यह क्या है?

  • जब आप फिक्स्ड लाइन टेलीफोनी पर किसी को फोन करते हैं, तो आपके और उस व्यक्ति के मध्य सम्पर्क स्थापित हो जाता है। कॉल के दौरान दोनों छोरों (Both ends) से बातचीत होती रहती है और इस दौरान बाहर किसी लाइन से सम्पर्क की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।
  • टेलीफोनिक वार्ता पूरे नेटवर्क पर करीब  64 kbps की तय गति से होती है। इस प्रकार दोनों तरफ को मिलाकर पूरी संचारण गति 128kbps हो जाती है।
  • एक कॉल के दौरान लाइन की पूरी क्षमता का प्रयोग नहीं होता है, क्योंकि बातचीत मध्य में रुकती भी रहती है और मध्य में चुप्पी भी आती रहती है। चूंकि एक पक्ष हमेशा सुनता रहता है इसलिए पूरी क्षमता का आधा हिस्सा ही एक साथ प्रयोग में रहता है।
  • इण्टरनेट पर चलने वाले डेटा आधारित नेटवर्क इस प्रकार के निश्चित सर्किट रीशफल (Reshuffle) का प्रयोग नहीं करते, बल्कि वे एक बिल्कुल लचीले माध्यम का उपयोग करते हैं, जिसे पैकेट स्विचिंग (Packet Switching) कहा जाता है।
  • जहाँ सर्किट स्विचिंग में सम्पर्क लगातार खुला और निरन्तर रहता है, वहीं पैकेट स्विचिंग में उतना ही सम्पर्क ओपन किया जाता है, जितना एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर को डेटा पैकेट भेजने के लिए जरूरी होता है।
  • इण्टरनेट के जरिए दो कम्प्यूटरों के मध्य डेटा की अदला-बदली का यही तरीका है। मान लीजिए, आप लम्बा वेब पेज भेज रहे हों। इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता कि साइट कितनी जल्दी लोड होती है, क्योंकि साइट के सभी डेटा एक साथ नहीं भेजे जाते।
  • इन डेटा पैकटों को छोटे पैकेटों में भेजा जाता है। डेटा के साथ वह एड्रेस जोड़ दिया जाता है जहाँ इन्हें पहुँचना है। यह विधि बहुत कुशल है, इसमें एक कम्प्यूटर एक साथ कई कम्प्यूटरों से सम्पर्क बना सकता है अर्थात् एक साथ वह कई कम्प्यूटरों को डेटा पैकेट भेज सकता है। इससे कम्प्यूटरों के मध्य कायम रहने वाले समय में काफी बचत हो जाती है और नेटवर्क का ट्रैफिक भी बहुत घट जाता है।
  • VoIP में इसी पैकेट स्विचिंग विधि का प्रयोग होता है। अगर नेटवर्क एक अकेले डायल-अप कनैक्शन से जोड़ा गया हो, तब भी उस पर एक साथ अनेक फोन कॉल की गुंजाइश बन जाती है। यानी जहाँ साधारण फोन लाइन के जरिए आप एक समय में एक ही कॉल कर सकते हैं, वहीं उसी कॉल से इण्टरनेट जोड़ने के बाद आप एक समय में अनेक कॉल कर सकते हैं।
  • VoIP वही लैंग्वेज बोलता और समझता है जो इण्टरनेट की भाषा है। हर बोले गए शब्द को इसमें डिजिटल बिट्स में तोड़ दिया जाता है। इन बिट्स को ध्वनि संपीडन (Compression) के खास फॉर्मूले से कम्प्रेस कर छोटे आकार में ढाल दिया जाता है। फिर इन टुकड़ों को भेज दिया जाता है।
  • कम्प्रेसन की इस क्रिया के कारण ध्वनि की गुणवत्ता में कुछ फर्क पड़ जाता है, अभी तक मौजूद तकनीक के मध्य सस्ते में आईपी तकनीक के जरिए सुदूर देशों तक बातचीत करने के बदले यह कीमत आपको चुकानी पड़ती है।

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