आनुवंशिकी की महत्वपूर्ण शब्दावलियां And आनुवंशिक रोग

आनुवंशिकी की महत्वपूर्ण शब्दावलियां And आनुवंशिक रोग

आनुवंशिकी की महत्वपूर्ण शब्दावलियां

एलील (Allele) :

  • वे जीन जो लक्षण को नियंत्रित करते हैं, एलील कहलाते हैं। ये जोड़े में होते हैं एवं प्रत्येक जीन एक-दूसरे का एलील कहलाता है। दोनों जीन मिलकर युग्म विकल्पी (Alleles) का निर्माण करते हैं।

समयुग्मज (Homozygous):

  • किसी जीन या गुण को समान एलीलि कोड करने वाले दो के जोड़े।

विषमयुग्मज (Heterozygous):

  • किसी असमान एलील जोड़े।

समलक्षणी (Phenotype):

  • जीवों के जो लक्षण प्रत्यक्ष रूप से दिखायी पड़ते हैं; उसे समलक्षणी कहते हैं।

समजीनी (Genotype):

  • किसी जीव या पादप की जीन संरचना उस जीव/पादप की समजीनी कहलाती है।

जीन विनिमय (Crossing Over):

  • अर्द्धसूत्री विभाजन की सिनेप्सिस क्रिया के दौरान समजाती गुणसूत्रों के नान-सिस्टर क्रोमोटिड में संगत आनुवंशिक अण्डों का पारस्परिक विनिमय होता है जिससे संलग्न जीनों के नये संयोजन बनते हैं।

ऑटोसोम्स (Auto Somes):

  • ये गुणसूत्र की कायिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं।

जीन (Gene):

  • डीएनए का वह छोटा खण्ड जिनमें आनुवंशिक कूट निहीत होता है।

जीनोम (Genome):

  • गुणसूत्र में पाये जाने वाले आनुवंशिक पदार्थ को जीनोम कहते हैं।

बैंक क्रॉस (Back Cross):

  • यदि प्रथम पीढ़ी के जीनोटाइप से पित्तृपीढ़ी के जीनोटाइप में शुद्ध या संकर प्रकार का संकरण कराया जाता है, तो यह बैक क्रॉस कहलाता है।

सुजननिकी (Eugenic):

  • आनुवंशिकी की वह शाखा जिसके अन्तर्गत मानव जाति को आनुवंशिक नियमों के द्वारा सुधारने का अध्ययन किया जाता है, उसे सुजननिकी कहते हैं।

गुणसूत्र प्रारूप (Karyotype):

  • पादप एवं जंतुओं में गुणसूत्र निश्चित लक्षण परिलक्षित करते हैं जैसे गुणसूत्र संख्या, आकार, परिमाण, भुजा की लंबाई, पिण्ड की स्थिति आदि। ऐसे लक्षण जिनके द्वारा अलग-अलग गुणसूत्रों को पहचाना जा सकता है, गुणसूत्र प्रारूप कहलाता है।

आनुवंशिक रोग

रंग वर्णान्धता (Colour blindness):

  • व्यक्ति को लाल व हरे रंग का भेद नहीं हो पाता है।

हीमोफीलिया (Haemophilia):

  • इसे रक्त स्रावण रोग या लिंग सहलग्न रोग भी कहते हैं। यह रोग पुरूषों में होता है।

हंसियाकार रक्ताणु ऐनीमिया (Sickle cell anaemia):

  • यह रोग सुप्त जीन के कारण होता है। इस रोग में ऑक्सीजन की कमी के कारण आरवीसी (RBC) हंसिया के आकार की होकर फट जाती है, जिसकी वजह से हीमोलिटिक एनीमिया (Haemolytic analmia) रोग हो जाता है।

डाउन्स सिन्ड्रोम (Down’s Syndrome):

  • ऐसे व्यक्ति में गुणसूत्रों की संख्या 47 होती है अर्थात इसमें 21वीं जोड़ी के गुणसूत्र दो के स्थान पर तीन होते हैं। इसमें जननांग समान होते हैं लेकिन पुरूष में नपुंसकता का रोग हो जाता है। इसे मंगोलियाई बेवकूफी (Mongoloid Idiocy) भी कहते हैं।

क्लाइनफेल्टर्स सिन्ड्रोम (Klinefelter’s Syndrome):

  • इसमें लिंग गुणसूत्र दो के स्थान पर तीन (XXY) होते हैं। हालांकि इसमें एक अतिरिक्त X-गुणसूत्र की मौजूदगी के कारण वृषण (Testes) तो होते हैं लेकिन उनमें शुक्राणु (Sperms) नहीं बनते हैं। ऐसे पुरूष नपुंसक होते हैं।

टनर्स सिन्ड्रोम (Turner’s Syndrome):

  • ऐसी स्थिति में एक xगुणसूत्र पाया जाता है। इनके जननांग अल्पविकसित होते हैं। वक्ष चपटा होता है। ये व्यक्ति नपुंसक होते हैं।

फीनाइल कीटोनूरिया (Phenyl Ketonuria):

  • बच्चों के तंत्रिका ऊतक में फीनाइल ऐलेमीन के जमाव से अल्पबुद्धि (Mental Deficiency) हो जाती है। इसमें एनजाइम फीनाइल ऐलेमीन हाइड्रोक्सीलेज की कमी हो जाती है।

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