आनुवंशिकी (Genetics)

आनुवंशिकी (Genetics)

All Types Gk PDF = Click Here To Download

  • जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत प्राणियों की आनुवंशिक भिन्नता, समानता, परिवर्धन, और विकास का अध्ययन किया जाता है। आनुवांशिकी (Genetics) कहलाता है।
  • आनुवांशिकी का महत्व लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में ही होता है, क्योंकि इन जीवों द्वारा उत्पन्न होने वाली संतति अपने माता एवं पिता दोनों के गुणों का समावेश होती है इसकारण इनमें कुछ लक्षण अपने पिता के समान कुछ लक्षण अपनी माता के समान और कुछ दोनों के सम्मिश्रित होते हैं जबकि अलैंगिक जनन करने वाला जीव आनुवांशिकी तौर पर शत प्रतिशत अपने जनक जीव के समान होता है, वातावरणीय और पोषणात्मक परिवर्तन के कारण इनकी बाह्य संरचना एवं विकास अपने जनक जीव से भिन्न हो सकती है, परंतु दोनों की आनुवांशिकी में सामान्य स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  • आनुवांशिकी विज्ञान की एक बहुत ही बड़ी शाखा है। आनुवांशिकी को अस्तित्व में लाने का श्रेय जार्ज जॉन मेण्डल (Gregor Johann Mendel) को जाता है, इसलिए इन्हे आनुवांशिकी का जनक (Father of Genetics) कहा जाता है।
  • प्रारंभ में मेण्डल के सिद्धान्तों को महत्व नहीं दिया गया जिसका एक प्रमुख कारण था कि उनकी धारणाएँ बहुत अधिक गणितीय गणनाओं पर आधारित थीं। परंतु बाद में मेण्डल एवं उनके खोज को स्वीकार कर लिया गया।
  • मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मीठी मटर (Garden pea) (Pisum sativum) का चयन किया। इस पौधे के चयन के पीछे निम्न कारण थे
  1.  मटर के पौधे का जीवन चक छोटा होता है जिसके कारण इसकी संततियाँ तुलनात्मक रूप से कम समयान्तराल में उपलब्ध हो जाती थीं।
  2.  मटर के विभिन्न पौधों के बाह्य संरचना में पर्याप्त अंतर होता है, जिससे इनका अध्ययन आसान था।
  3.  इनके फूलों के विशिष्ट आकार के कारण इनका अपनी इच्छानुसार परागण करवाना आसान था।
  4. मटर के पौधे उनके प्रयोग क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध थे।
  • अपने प्रयोग के लिए मेण्डल ने मटर के पौधों के सभी गुणों को नहीं लिया बल्कि उसने कुल सात गुणों का चयन किया और इन्हीं सात गुणों के आधार पर अपना प्रयोग किया। उन्होंने मटर के बाह्य स्वरूप में आसानी से परिलक्षित होने वाले गुण लिये- जैसे- मटर के पौधे की लंबाई (लंबा या बौना), फूलों का रंग (नीला या सफेद), बीजों का आकार (गोल या झुरींदार), पौधे पर फल लगने का स्थान (अक्ष पर या शीर्ष पर) आदि।
  • मेण्डल ने एक लंबा पौधा एवं एक छोटा पौधा लिया और इन दोनों में cross कराया। प्राप्त संतति जिसे उसने F, genration कहा में उसे सभी पौधे लंबे मिले। उसने फिर प्राप्त संतति का self cross कराया (स्वयं से निषेचन) __ जिससे प्राप्त संततियों को उसने F, नाम दिया। इसमें से एक एक बौना पौधा भी प्राप्त हुआ। इस प्रयोग को निम्न रेखाचित्र द्वारा समझाया जा सकता है।

इस परिणाम के आधार पर मण्डल ने अपना पहला नियम दिया—

(1) प्रभाविकता का नियम (Law of Dominance)

  • प्रभाविकता का नियम कहता है कि यदि किसी लक्षण के युगल जीन एक साथ एक ही जीव में उपस्थित हों तो उनमें से केवल एक ही प्रौद जीव में द ष्टिगोचर होता है। यह लक्षण प्रभावी लक्षण (Dominant Character) कहलाता है तथा दूसरा लक्षण जो स्वयं को व्यक्त नहीं कर पाता उसे अप्रभावी लक्षण (Recessive character) कहते हैं।

(2) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)

  • यह नियम कहता है, कि प्रत्येक पादप में किसी गुण के लिए दो जोड़ी जीन होते हैं. जिनमें से संतति पादप मात्र एक जीन प्राप्त करता है और दूसरा गुणसूत्र यह अपने दूसरे जनक से प्राप्त करता है. इस प्रकार किसी गुण के लिए उसके पास भी एक जोड़ी जीन हो जाते हैं।

(3) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)

  • यह नियम कहता है कि विभिन्न गुणों के लिए पृथक पृथक जीन होते हैं और प्रत्येक गुण का वहन दूसरे गुण के वहन से पृथक एवं स्वतंत्र होता है।
  • मेण्डल के इन खोजों के बाद आनुवांशिकी के जगत में बहुत सारे प्रयोग किये गये और कई नये तथ्य और थ परणाएँ सामने आती गई। अभी भी आनुवांशिकी के क्षेत्र में नित्य नये आविष्कार हो रहे हैं जो पृथ्वी पर जीवों के विकास एवं विभिन्नताओं को समझने के लिए आवश्यक है।
    आनुवांशिकी की इकाई में ही गुणसूत्रों की संरचना, DNA की संरचना नये DNA का निर्माण आदि पढ़ा जाता है। जिनकी चर्चाएँ आगे की जा रही हैं। उसके पूर्व आनुवांशिकी से जुड़े कुछ पारिभाषिक शब्दों को जान लेना ज्यादा लाभप्रद होगा।

Read Also —

Physics Notes In Hindi

Physics MCQ In Hindi

Biology MCQ In Hindi

Chemistry MCQ In Hindi

Leave a Reply