जैव विकास के पक्ष में कुछ प्रमाण

जैव विकास के पक्ष में कुछ प्रमाण ( Some evidence in favor of organic evolution )

(1) समजात अंग (Homologous Organs)

  • वे अंग जिनकी मौलिक संरचना एवं उत्पत्ति समान होती हैं, उन्हें समजात अंग कहते हैं। समजात अंग विभिन्न जीवों में उनके वातावरणिक अनुकूलन के कारण विभिन्न रूपों में रूपान्तरित हो जाते हैं, और उनकी बाह्य संरचना एवं कार्य भिन्न हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर मनुष्य के हाथ, चमगादड़ के पंख और घोड़े के अग्र पाद समजात अंग हैं, अर्थात् इनकी उत्पत्ति एवं मौलिक संरचना एक समान है। इन जीवों की भ्रूणावस्था का अवलोकन करने पर पता चलता है, कि अपनी भ्रूणावस्था के प्रारंभिक अवस्था में ये संरचनाएँ अत्यधिक समानता रखती हैं, परंतु कालांतर में पकड़ बनाने, उड़ने और दौड़ने के अनुसार इनमें अत्यधिक रूपान्तरण हो जाता है, और ये पूर्णतः भिन्न अंग प्रतीत होते हैं।

(2) समवृत्ति अंग (Analogous Organs)

  • जीवों की विभिन्न जातियों में कुछ ऐसे अंग होते हैं, जिनकी बाह्य संरचना एवं कार्य तो समान होते हैं, किन्तु मौलिक संरचना एवं उत्पत्ति पूर्णतः भिन्न होती है, इन अंगों को समवृत्ति अंग कहते हैं। चमगादड़ के पंख और कीटों के पंख समवृत्ति अंगों के उदारहण हैं, क्योंकि दोनों ही उड़ने में सहायक होते हैं, परंतु इन दोनों की उत्पत्ति पूर्णतः भिन्न होती है, चमगादड़ के पंख इसके अग्रपाद का रूपान्तरण होते हैं जबकि कीटों के पंख इनके बाह्य कंकाल का रूपान्तरण।

(2) समवृत्ति अंग (Analogous Organs)

  • जीवों की विभिन्न जातियों में कुछ ऐसे अंग होते हैं, जिनकी बाह्य संरचना एवं कार्य तो समान होते हैं, किन्तु मौलिक संरचना एवं उत्पत्ति पूर्णतः भिन्न होती है, इन अंगों को समवृत्ति अंग कहते हैं। चमगादड़ के पंख और कीटों के पंख समवृत्ति अंगों के उदारहण हैं, क्योंकि दोनों ही उड़ने में सहायक होते हैं, परंतु इन दोनों की उत्पत्ति पूर्णतः भिन्न होती है, चमगादड़ के पंख इसके अग्रपाद का रूपान्तरण होते हैं जबकि कीटों के पंख इनके बाह्य कंकाल का रूपान्तरण।

(4) संयोजक कड़ी (Connecting Link)

  • वे जीव जो विकास की प्रक्रिया में दो विभिन्न प्रकार के जीवों का संबंध स्थापित करते हैं, संयोजक कड़ी कहलाते हैं। इन संयोजक कड़ियों में उन दोनों प्रकार के जीवों के लक्षण पाये जाते हैं, जिनके बीच यह संबंध स्थापित करते हैं। फास की प्रक्रिया को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यह कम विकसित जीवों से अधिक विकसित जीवों के निर्माण के जीते-जागते सबूत होते हैं। उदाहरण के तौर पर विषाणु को निर्जीव एवं जीवन के बीच की संयोजक कड़ी माना जाता है, क्योंकि इसमें बहुत से गुण निर्जीवों के और बहुत से गुण सजीवों के पाये जाते हैं, जो यह दर्शाता है कि जीवन की उत्पत्ति अंततः हुई तो निर्जीव तत्वों से ही है। आक्रियोप्टेरिक्स को सरीसृप और पक्षियों के बीच की कड़ी माना जाता है, जिसके बहुत से गुण सरीसृपों की तरह थे परंतु जो पक्षियों की तरह उड़ सकता था, जो यह बताता है कि पक्षियों की उत्पत्ति सरीसृपों से हुई है। इसी प्रकार हमारे जीव-जगत में अनेक ऐसे संयोजक कड़ी हैं जो विकास की प्रक्रिया को समझने में सहायक होते हैं।
  1. पेरीपेटस एनीलिडा और आर्थोपोडा के बीच की संयोजी कड़ी है।
  2.  एकीडना सरीसृप एवं स्तनधारी के बीच की संयोजी कड़ी है।
  3. विषाणु निर्जीव एवं सजीव के बीच की संयोजी कड़ी है।
  4. आक्रियोप्टेरिक्स सरीसृप एवं पक्षियों के बीच की कड़ी हैं।
  5.  नियोपाइलाइना एनीलिडा और मोलस्का के बीच की कड़ी है।
  6. प्रोटोप्टेरस मछली और उभयचर के बीच की कड़ी है।
  7. काईमेरा उपास्थिल एवं अस्थिल मछलियों के बीच की कड़ी हैं।
  8.  बैलेनोग्लोसस अकशेरूक एवं कशेरूक जीवों की बीच की कड़ी हैं।

(5) जीवों का भूर्णीय विकास (Embryonic Development of Organisms)

  • विभिन्न जीवों के भ्रूणीय विकास के चरणों को अवलोकित करने पर सभी में भ्रूणीय विकास के चरण एक समान प्रतीत होते हैं, जो इन जीवों का एक-दूसरे से संबंध दर्शाता है।

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