पादप ऊतक (Plant tissues)

पादप ऊतक (Plant tissues)

  • पादपों को सूक्ष्म अवलोकन करने पर हमें मालूम चलता है पादपों में वृद्धि कैसी होती है? उनमें भोजन का संग्रह कहाँ और कैसे होता है? पादप के कौन से अंग मजबूत होते हैं कौन-से नाजुक होते हैं? पादपों में शाखाएं. पत्तियाँ कहाँ से निकलती हैं? आदि। पादपों के विभिन्न अंगों में संपन्न होने वाली विभिन्न प्रकार की क्रियाओं तथा इनकी वृद्धि का विशिष्ट प्रारूप विभिन्न प्रकार के पादप ऊतकों का विभिन्न स्थलों पर उपस्थित रहकर अपना विशिष्ट कार्य संपादित करता है।

पादप ऊतकों को निम्न प्रकार से विभेदित किया जा सकता है

(1) विभज्योतक (Meristematic tissue)

  • विभज्योतक ऊतक की कोशिकाओं में विभाजन की अपार क्षमता होती है। यदि हमने किसी पौधे को ध्यान से देखा होगा तो हमको मालूम होगा कि पादपों में विकास पूरे शरीर में नहीं होता बल्कि कुछ विशेष भागों में सिमित होता है. जैसे पादपों की लंबाई बढ़ती है. उनके जड़ की लंबाई बढ़ती है, पर्वसंधियों से नयी शाखाएँ और नयो पत्तियाँ निकलती हैं आदि। पौधे के वे भाग जहाँ नयी कोशिकाएँ बनती हैं, वहाँ ये विभयातक बड़ी संख्या में पाये जाते हैं। वास्तव में विभज्योतक ऊतकों की कोशिकाओं में विभाजित होने की अपार क्षमता होती है. इसलिए वे कोई और कार्य न कर निरंतर विभाजित होती रहती हैं, जिनसे पादप की लंबाई और चौड़ाई बढ़ती है।
  • निरंतर विभाजन करने के लिए इन कोशिकाओं में अनेक गुण होते हैं जो इनके विभाजन की दर को बनाए रखते हैं। इन्हें विभन्योतक ऊतकों की कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षण (Specific characterstics) कहा जा सकता है। ये निम्न हैं
  1. इनमें कोशिकाद्रव्य की मात्रा बहुत अधिक होती है।
  2. इनकी कोशिका भित्ती बहुत पतली होती है, जिससे विभाजन के समय नयी कोशिकाओं के उत्पन्न होने की प्रक्रिया आसान होती है।
  3.  स्पष्ट केन्द्रक होते हैं, क्योंकि कोशिकाविभाजन के समय केन्द्रक स्पष्ट हो जाता है।
  4.  इनमें रसधानी अनुपस्थित होती है, या अत्यंत द्वासित होती है, क्योंकि अत्यधिक क्रियाशील होने के कारण इन ऊतकों की कोशिकाओं को ऊर्जा की अत्यधिक आवश्यकता होती है इसलिए इनमें जमा करने के लिए भोजन उपलब्ध नहीं होता, इसलिए रसधानियों की आवश्यकता नहीं होती।

(2) स्थायी ऊतक (Permanent tissues)

  • विभज्योतक ऊतक की कोशिकाओं के निरंतर विभाजन से पौधे का आकार एवं आयतन तो बढ़ने लगता है परंतु पौध में में वृद्धि के अलावा अन्य सभी प्रकार के कार्य जैसे- जल एवं भोजन का संवहन, भोजन का संग्रह, पादपों की सुरक्षा आदि सभी प्रकार के कार्य स्थायी ऊतकों द्वारा संपन्न किये जाते हैं। इन ऊतकों को स्थायी ऊतक कहा जाता है क्योंकि इनमें विभाजन की क्षमता नहीं होती। स्थायी ऊतकों को पुनः दो भागों में बाँटा जाता है
  1. सरल स्थायी ऊतक (Simple permanent tissue)
  2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex permanent tissue)
  • जो विभज्योतक विभाजन की क्षमता खो देते हैं, वे ही स्थायी ऊतकों में विभेदित हो जाते हैं। विभेदन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत सामान्य कोशिका किसी विशिष्ट कार्य को करने के लिए रूपान्तरित एवं अनुकूलित होकर विशिष्ट लक्षण ग्रहण करती है।

(1) सरल स्थायी ऊतक (Simple permanent tissue):

  • ये ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। कोशिकाओं की संरचना, एवं विशिष्ट कार्यों के लिए उनके विशिष्ट लक्षणों के आधार पर सरल स्थायी ऊतकों को पुनः तीन प्रकारों में विभक्त किया जाता है।

(2) जटिल स्थायी ऊतक (Complex permanent tissues) :

  • वे स्थायी ऊतक, जो दो या दो से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं जटिल स्थायी कतक कहलाते हैं। इनकी जटिल संरचना के कारण ही इनको जटिल स्थायी ऊतक कहा जाता है। पौधों के दोनों संवहनी ऊतक जाइमल और फ्लोएम जटिल स्थायी ऊतक की श्रेणी में आते हैं।

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