राजस्थान में क्रांतिकारी घटनाएँ

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राजस्थान में क्रांतिकारी घटनाएँ

  • राजस्थान में क्रांतिकारी घटनाओं को अंजाम देने का श्रेय केसरीसिंह बारहठ, खरवा ठाकुर गोपालसिंह, अर्जुनलाल सेठी (जयपुर), सेठ दामोदर दास राठी (ब्यावर) को दिया जाता है। इन्होंने राजस्थान में अभिनव-भारत समिति’ नामक क्रांतिकारी संगठन की शाखा स्थापित की।
  • क्रान्तिकारी नवयुवकों को प्रशिक्षण देने का कार्य अर्जुनलाल सेठी अपने वर्द्धमान विद्यालय (1907, जयपुर) में करते थे, यहाँ से शिक्षित नवयुवकों को मास्टर अमीरचन्द क्रांतिकारी गतिविधियों का व्यावहारिक ज्ञान देते थे।

नीमाज (आरा) हत्याकाण्ड

  • बिहार के नीमाज (आरा) मठ पर क्रांतिकारियों हेतु धन लूटने के इरादे से धावा बोलकर महंत की क्रांतिकारियों ने हत्या कर दी। यह कार्य अर्जुनलाल सेठी के वर्धमान विद्यालय से प्रशिक्षित विष्णुदत्त, मोतीचंद व उनके साथियों ने किया।

हार्डिग्स बम काण्ड

  • 23 दिसम्बर, 1912 को गवर्नर जनरल लार्ड हार्डिंग्स के जुलूस पर बम रासबिहारी बोस की योजनानुसार पंजाब नेशनल बैंक चाँदनी चौक की छत पर चढ़कर जोरावरसिंह बारहठ, बसन्त कुमार विश्वास व प्रतापसिंह ने फेंका।

राजस्थान में सशस्त्र क्रांति –

  • 21 फरवरी 1915 को सम्पूर्ण देश में सशस्त्र क्रांति का निर्णय क्रांतिकारियों की रासबिहारी बोस के नेतृत्व में 12 फरवरी 1915 को हुई बैठक में लिया। राजस्थान में इस क्रांति की जिम्मेदारी ठाकुर गोपाल सिंह खरवा व भूपसिंह (विजयसिंह पथिक) को सौपी, इन्होंने क्रांतिकारी साथियों के साथ खरवा (अजमेर) के जंगलों में हथियार एकत्र किये। लेकिन क्रांति का भेद खुल जाने पर गोपालसिंह व भूपसिंह को गिरफ्तार कर टाडगढ़ दुर्ग में बंद रखा, भूपसिंह यहाँ से भागकर बिजौलियाँ पहुँच गये जहाँ उन्होंने विजयसिंह पथिक के नाम से किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया।
  • अजमेर के चीफ कमिश्नर की हत्या करने का असफल प्रयास अप्रेल 1932 को ज्वाला प्रसाद व रामचन्द्र बापती ने किया।

डोगरा गोलीकाण्ड

  • अजमेर के उपाधीक्षक पुलिस पी.ए. डोगरा व सी.आई.डी. एस.आई. खलीलउद्दीन पर गोलियाँ ज्वालाप्रसाद व साथियों की योजनानुसार रामसिंह ने चलाईं।

मेयो कॉलेज बम केस –

  • 1934 में वायसराय की अजमेर यात्रा के दौरान उनकी हत्या करने के इरादे से क्रान्तिकारी फतेहचंद ने मेयो कॉलेज के निकट खाली मकान में हथियारों से भरे बैग छिपाये लेकिन पुलिस ने छापा मारकर हथियार बरामद कर लिये।
  • राजकीय कॉलेज अजमेर के चपरासी द्वारा इम्पीरियल बैंक अजमेर से निकाले गये स्टाफ वेतन से भरा बैग छीनने का असफल प्रयास ज्वालाप्रसाद, जगदीश दत्त, मदनगोपाल, हेमचन्द व रामसिंह बापती ने किया।
  • शाहपुरा के क्रांतिकारी केसरीसिंह बारहठ, उनके भाई जोरावर सिंह बारहठ, पुत्र प्रतापसिंह बारहठ ने आजादी की खातिर अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
  • बनारस षड्यंत्र केस में 1917 ई. में गिरफ्तार प्रतापसिंह बारहठ अंग्रेजों की यातनाओं के कारण बरेली (उत्तर प्रदेश) की जेल में _मात्र 22 वर्ष की आयु में 27 मई, 1918 को शहीद हो गया।
  • “भारत माता का पुत्र उसकी मुक्ति के लिए बलिदान हो गया।” यह शब्द प्रतापसिंह बारहठ के शहीद होने पर उनके पिता केसरीसिंह बारहठ ने कहे थे।
  • प्यारेलाल हत्याकाण्ड के संदेह में केसरीसिंह बारहठ को गिरफ्तार करके 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाकर हजारीबाग (बिहार) जेल भेज दिया लेकिन इन्हें पाँच साल बाद रिहा कर दिया गया।

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