Functions and Powers of the Lok Sabha in Hindi

Functions and Powers of the Lok Sabha in Hindi ,

लोकसभा के कार्य एवं शक्तियां (Functions and Powers of the Lok Sabha in Hindi)

  • लोकसभा संसद का प्रथम या निम्न सदन है, जिसका सभापतित्व करने के लिये एक अध्यक्ष होता है। लोकसभा अपनी पहली बैठक के पश्चात यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनती है। (अनु. 93)
  • लोकसभा को निर्वाचित सदन, लोकप्रिय सदन, जनता का सदन एवं उत्तरदायी सदन भी कहा जाता है।
  • मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 500 निश्चित की गयी है। अभी इसके सदस्यों की अधिकतम सदस्य संख्या 552 हो सकती है। इनमें से अधिकतम 530 सदस्य राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से व अधिकतम 20 सदस्य संघीय क्षेत्रों से निर्वाचित किये जा सकते हैं एवं राष्ट्रपति आंग्ल भारतीय वर्ग के अधिकतम दो सदस्यों का मनोनयन कर सकतें है। वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है। इन सदस्यों में 530 सदस्य 28 राज्यों से 13 सदस्य 7 केन्द्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होते है तथा दो सदस्य आंग्ल भारतीय वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते है।
  • लोकसभा के सदस्यों का चुनाव गुप्त मतदान के द्वारा वयस्क मताधिकार (18 वर्ष) के आधार पर होता है।
  • 61वें संवैधानिक संशोधन (1989ई.) के अनुसार भारत में अब 18 – वर्ष की आयु प्राप्त व्यक्ति को वयस्क माना गया है।
    लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है लेकिन लोकसभा बहुमत के अभाव में 5 वर्ष से पूर्व भी भंग हो सकती है। अब तक भारत में 9 बार लोकसभा समय से पूर्व भंग हो चुकी है।

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लोकसभा की अधिकतम सीटें –

  1. उतरप्रदेश – 80
  2. महाराष्ट्र – 48
  3. पं. बंगाल – 42
  4. बिहार  – 40
  5. तमिलनाडु – 39

लोकसभा की सबसे कम सीटें –

  1. नागालैण्ड – 1
  2. सिक्किम – 1
  3. मिजोरम – 1

केन्द्रशासित प्रदेशों में सीटें –

  • दिल्ली – 7, अन्य सभी में 1-1

लोकसभा की सदस्यता के लिये अनिवार्य योग्यताएं निम्न है–

  1. भारत का नागरिक हो।
  2. 25 वर्ष की आयु या इससे अधिक।
  3. भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अंतर्गत वह कोई लाभ का पद पर नही हों।
  4. वह पागल या दिवालिया न हो।

लोकसभा की सदस्यता के लिये अनिवार्य Point :- 

  • लोकसभा का अधिकतम कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है। मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामुहिक रूप से उत्तरदायी होती है। (अनु. 75 (3))
  • प्रधानमंत्री के परामर्श के आधार पर राष्ट्रपति के द्वारा लोकसभा को समय से पूर्व भी भंग किया जा सकता है, ऐसा अब तक 9 बार (1970, 1977, 1979, 1984, नवम्बर 1989, मार्च 1991, दिसम्बर, 1997,अप्रैल 1999, 2004) किया गया है।
  • आपातकाल की घोषणा लागू होने पर विधि द्वारा संसद लोकसभा के कार्यकाल में वृद्धि कर सकती है, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नही होगी। 1976ई. में लोकसभा का कार्यकाल दो बार एक -एक वर्ष बढ़ाया गया था।
  • लोकसभा एवं राज्यसभा के अधिवेशन राष्ट्रपति के द्वारा ही बुलाए और स्थगित किये जाते है। लोकसभा की दो बैठकों में 6 माह से अधिक का अंतर नही होना चाहिये।
  • लोकसभा की गणपुर्ति या कोरम कुल सदस्य संख्या का दसवाँ भाग (55 सदस्य) होता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 108 में संसद के संयुक्त अधिवेशनकी व्यवस्था है। संयुक्त अधिवेशन राष्ट्रपति के द्वारा निम्न तीन स्थितियों में बुलाया जा सकता है। विधेयक एक सदन से पारित होने के बाद जब दूसरे सदन में जाएं तब यदि —
  1. दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकार कर दिया गया हो,
  2.   विधेयक पर किये जाने वाले संशोधनों के बारे में दोनों सदन अंतिम रूप से असहमत हो गए है।
  3. दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से उसके द्वारा विधेयक पारित किये बिना 6 मास से अधिक बीत गये हों।
  • संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष के द्वारा की जाती है। संयुक्त बैठक से अध्यक्ष की अनुपस्थिति के दौरान सदन का उपाध्यक्ष या यदि वह भी अनुपस्थित है, तो राज्यसभा का उपसभापति या यदि, वह भी अनुपस्थित है, तो ऐसा अन्य व्यक्ति पीठासीन होगा, जो उस बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा अवधारित किया जाये।
  • भारत में अब तक तीन बार – 1961, 1978 और 2002 में संयुक्त अधिवेशन बुलाया गया।
  • धन विधेयक के संबंध में लोकसभा का निर्णय अंतिम होता है। इस सम्बंध में संयुक्त अधिवेशन की व्यवस्था नही है।
  • संविधान संशोधन विधेयक पर भी संयुक्त-अधिवेशन की व्यवस्था नही है, संविधान संशोधन विधेयक दोनो सदनों में अलग-अलग पारित होना चाहिये।
  • लोकसभा के पदाधिकारी- अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष – संविधान के अनुच्छेद 93 के अनुसार लोकसभा स्वयं ही अपने सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेगी।
  • अध्यक्ष उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अध्यक्ष को त्यागपत्र देता है।
  • लोकसभा के अध्यक्ष, अध्यक्ष के रूप में शपथ नही लेता, बल्कि सामान्य सदस्य के रूप में शपथ लेता है।
  • चौदह दिन के पूर्व सूचना देकर लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, को पद से हटाया जा सकता है।
  • लोकसभा के भंग होने की स्थिति में अध्यक्ष अपना पद अगली __लोकसभा की पहली बैठक होने तक रिक्त नहीं करता है।
  • लोकसभा में अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा बनाये गये वरिष्ठ सदस्यों का पैनल में से कोई व्यक्ति, पीठासीन होता है। इस पैनले में आमतौर पर 6 सदस्य होते है।

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