मापन में शुद्धता तथा त्रुटियाँ

मापन में शुद्धता तथा त्रुटियाँ ( Accuracy and Earror in Measurements )

mapan me truti or truti ke prakar

  • हम सभी जानते हैं कि मापन की प्रकिया एक तुलना है। किसी भी भौतिक राशि का मापन करने के लिए उसकी तुलना मानक मात्रक से करते हैं। साधारणतया कोई भी मापन शुद्ध नहीं होता है। प्रत्येक मापन में त्रुटि पाई जाती है एवं किसी भी त्रुटि को पूर्णतया नहीं हटाया जा सकता है।
  • “अतः किसी भी राशि के वास्तविक या सही मान (true value) एवं मापे गये मान का अन्तर ही त्रुटि कहलाती है।

त्रुटि के प्रकार (types of errors)

त्रुटि प्रमुखत: तीन प्रकार की होती है –
1. क्रमबद्ध त्रुटि (systematic errors)
2. यादृच्छिक त्रुटि (random errors)
3. स्थूल त्रुटि (gross errors)

1. क्रमबद्ध त्रुटि (systematic errors) –  

  • इस प्रकार की त्रुटियों का कारण ज्ञात रहता है एवं इन त्रुटियों में कमी लाई जा सकती है।
  • यंत्रों के कारण-ये त्रुटि यंत्र की संरचना के बनावट एवं निर्माण में त्रुटि के कारण उत्पन्न होती है। एक ही यंत्र में विभिन्न पैमानों के शून्याकों का मिलान न होने कारण यंत्र में शून्यांक त्रुटि उत्पन्न होती है। सुग्राही एवं उच्च गुणवत्ता के यंत्रों का उपयोग करके इस प्रकार की त्रुटि को कम किया जा सकता है।
  • व्यक्तिगत त्रुटि-इस प्रकार की त्रुटि किसी भी व्यक्ति की अनुभव की कमी के कारण उत्पन्न होती है। जैसे- किसी भी उपकरण का ठीक प्रकार से समायोजन नहीं करना, उपकरण को असावध पानी से रख कर पाठ्यांक लेना आदि से इस प्रकार की त्रुटि उत्पन्न होती है।
  • पूर्णस्थता की कमी से त्रुटि-वे त्रुटियाँ जिनका कारण ज्ञात होते हुये भी उन्हें दूर नहीं किया जा सकता है पूर्णस्थता की कमी या अपूर्णता त्रुटि कहलाती है। जैसे-विकिरण हानि होने के उपरान्त ऊष्मा का मापन आदि।
  • बाह्य कारकों के कारण-प्रयोग के समय ताप, दाब, वायु वेग, आर्द्रता आदि बाह्य कारकों में परिवर्तन हो जाने से भी त्रुटि उत्पन्न होती है। इस प्रकार की त्रुटि को कम करने के लिए बाह्य कारकों के प्रभाव को कम करना होगा।
  • नियत त्रुटि –यदि सभी प्रेक्षणों में समान त्रुटि की पुनरावृत्ति होती है तब यह त्रुटि नियत त्रुटि कहलाती है।

2. यादृच्छिक त्रुटि (random errors) – 

  • इस प्रकार की त्रुटियाँ अत्यधिक भिन्नता के कारण होती है। कभी-कभी इस प्रकार की त्रुटियाँ अवसरीय त्रुटि कहलाती है। यदि कोई व्यक्ति अपने पाठ्यांकों की पुनरावृत्ति करे तो व्यक्ति प्रत्येक प्रेक्षण में त्रुटि करता है एवं इस प्रकार की त्रुटि को अंकगणीतीय माध्य के द्वारा कम करके शुद्धतम मान प्राप्त किया जा सकता है। 

3. स्थूल त्रुटि (gross errors) –

  • व्यक्ति की असावधानी के कारण मापन में जो त्रुटि प्रवेश कर जाती है। वह स्थूल या सम्पूर्ण त्रुटि कहलाती है। ये निम्न कारणों से उत्पन्न होती है–
  • यंत्रों को बिना समायोजन के पाठ्यांक लेना।
  • गलत तरीकों से पाठ्यांक लेना।
  • पाठ्यांक लिखते समय गलती कर देना।
  • गणना के समय पाठ्यांक गलत रख देना।

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