ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत 

ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत 

Non-Traditional Sources of Energy in Hindi ( ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत  )

  • ऊर्जा स्त्रोत जो सापेक्ष रूप से नये हैं और जिनका प्रयोग हाल ही में शुरू हुआ है, उन्हें ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोत कहा जाता है जैसे- परमाणु शक्ति, सौर ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि।

A. सौर ऊर्जा

  • सूर्य द्वारा ताप और प्रकाश के रूप में छोड़ी गयी ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं।
  • सौर ऊष्मांक = 1.4 (kj/s.m2)
  • पृथ्वी का दूसरा छोर 1.4kj/s.m2 के बराबर सौर ऊर्जा प्राप्त करता है जिसे सौर ऊष्मांक कहा जाता हैं।

सौर ऊर्जा के प्रयोग

  • सोलर कूकर: सोलर कूकर डिजाइन और कार्य में बहुत आसन है। है।यह सामान्यता शीशों से बना होता है। एक आयताकार डिब्बे में समतल दर्पण लगाए जाते हैं। समतल दर्पण से प्रतिबिम्बित प्रकाश सोर कुकर के अंदर सौर ऊर्जा को केंद्रित करता है जो खाना बनाने के लिए पर्याप्त गर्मी उत्पन्न करता है।
  • सौर भट्टी: सौर भट्टी अवतल दर्पण की भांति बनी होती है। बड़ी सौर भट्टी में एक बहुत बड़ा उत्तल दर्पण बनाने के लिए बहुत से छोटे दर्पण लगे होते हैं। गर्म करने वाली वस्त दर्पण के फोकस के पास रखी जाती है।
  • सोलर सेल: सोलर सेल सिलिकॉन से बने होते हैं। सोलर पैनल सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है जो बाद में प्रयोग करने हेतु बैटरी में संग्रहीत की जाती है। जब बहुत अधिक संख्या में एक व्यवस्थित क्रम में सोलर सेल को जोड़ा जाता है तो इसे सोलर सेल पेनल कहा जाता है।
  • सौर ऊर्जा की सीमाएं: सौर ऊर्जा को काम में लाने की तकनीक आरंभिक चरण में है। वर्तमान में, सौर ऊर्जा को प्रयोग करने के लिए लागत लाभकारी अनुपात सहायक नहीं है। सौर ऊर्जा का प्रयोग करना अत्यधिक महंगा है।

B. समुद्र से प्राप्त ऊर्जा

  • महासागर पृथ्वी के 70% भाग पर हैं। इनमें बहुत अधिक ऊर्जा है जो विभिन्न कार्यों हेतु प्रयोग की जाती है। तकनीकी रूप से उपलब्ध ऊजएिं निम्नलिखित हैं
  • I. ज्वारीय ऊर्जा – घुमती हुई पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण, समुद्रों में जल का स्तर बढता और घटता रहता है जिसके परिणामस्वरूप उच्च व निम्न लहरे उठती हैं। समुद्री लहरों का ये अंतर हमें ज्वारीय ऊर्जा प्रदान करता है। समुद्र में एक संकीर्ण बांध बनाकर ज्वारीय ऊर्जा को काम में लाया जाता है।बांध के आरम्भ में लगा टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत में परिवर्तित करता है।
  • II. सागरीय ऊर्जा – समुद्र के चारों ओर चलने वाली तेज पवनों से धारा बनती हैं। इस बहते जल की गतिक ऊर्जा बिजली उत्पन्न करने के लिए जनरेटर के टरबाइन को घुमाती है। जब तेज पवनें चलना बांध कर देती हैं तो जनरेटर बिजली उत्पन्न करना बंध कर देता है।
  • III. महासागरीय ऊष्मीय ऊर्जा- समुद्र या महासागर की सतह पर जल सूर्य द्वारा गरम किया जाता है जबकि गहरे भागों में पानी अपेक्षाकत ठंडा होता है। तापमान में अंतर, महासागरीय ऊष्मीय ऊर्जा संपरिवर्तन संयंत्रों में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अवशोषित किया जाता है।
  • सतही जल और 2 किमी की गहराई के जल के तापमान में अंतर 20°C या इससे अधिक का होना चाहिए। गर्म सतही जल वाष्पशील द्रव जैसे अमोनिया को उबलने के लिए प्रयोग किया जाता है। द्रव के वाष्प जनरेटर के टरबाइन को चलाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ठन्डे जल को (गहरी परतों से) वाष्प से द्रव में संघनित करने के लिए पंपित किया जाता है। महासगीय ऊष्मीय ऊर्जा को काम में लाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले विद्युत संयंत्र को ‘महासागरीय ऊष्मीय ऊर्जा संपरिवर्तन संयंत्र’ कहते हैं।

C. भू-तापीय ऊर्जाः

  • पृथ्वी के अंदर पिघली हुई चटटाने पृथ्वी के विभिन्न भागों में धकेली जाती है। ऐसे क्षेत्र पृथ्वी के गर्म स्थान कहे जाते हैं। जब भौमजल इन गर्म स्थानों के सम्पर्क में आता है तो बहत अधिक भाप उत्पन्न होती है। इस भाप का प्रयोग ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु किया जाता है। कभी-कभी, इन क्षेत्रों से गर्म जल सतह के बाहर आ जाता है। इस बाहर आए जल को गर्म जल का सोता कहा जाता है। न्यूजीलैंड और यूएसए में बहुत से विद्युत संयंत्र भू-तापीय ऊर्जा पर काम करते हैं।

D. परमाणु ऊर्जा

  • परमाणु ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी परमाणु के नाभिक में होती है।
  • परमाणु ऊर्जा दो प्रकार की होती है !
  1. नाभिकीय विखंडन– यह एक प्रक्रिया है जिसमें एक नाभिक दो न्युक्लाइड बनाने के लिए टूटता है। इस प्रक्रिया से बहत अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यह घटना नाभिकीय संयंत्रों में विदयत उत्पन्न करने के लिए प्रयोग की जाती है। U-235 यूरेनियम रोड के रूप में नाभिकीय रिएक्टर में ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है
    2.नाभिकिय संलयन-जब दो हल्के न्युक्लाइड भारी नाभिक बनाने के लिए मिलाए जाते हैं और अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, तो इसे परमाणु संलयन के रूप में जाना जाता है। हाइड्रोजन बम इस घटना पर आधारित है। परमाणु संलयन सूर्य और तारों में ऊर्जा का स्रोत है।

नाभिकीय ऊर्जा के लाभ

  1. अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  2. किसी परमाणु संयंत्र में, लम्बे समय तक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए एक बार परमाणु ईंधन डाला जाता है।

नाभिकीय ऊर्जा के दोष

  1. लगाने की बहुत अधिक लागत।
  2. अनुचित परमाणु निपटान के कारण पर्यायवरण संदूषण हो सकता है।

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