Rivers of Rajasthan Part = 2

Rivers of Rajasthan ( राजस्थान की प्रमुख नदियाँ )

     Part =2

अपवाह क्षेत्र के आधार पर राज्य की नदियों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है—

  1. आन्तरिक अपवाह प्रणाली (60.2%),
  2. अरब सागरीय अपवाह प्रणाली (17.1%), एवं
  3. बंगाल की खाड़ी की अपवाह प्रणाली (22.4%)

2. अरब सागरीय अपवाह तंत्र –

लनी नदी–(मरु आशा/लवणवती/लवणी)

  • थार के मरुस्थल की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सबसे लम्बी नदी लूनी का उद्गम अजमेर एवं पुष्कर के मध्य स्थित नागपहाड़ एवं आनासागर झील हैं। राज्य के कुल अपवाह क्षेत्र का 10.40% भाग लूनी बेसिन का है। इस दृष्टि से यह चम्बल के पश्चात् राज्य की दूसरी सबसे बड़ी नदी है।
  • यह नदी अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर एवं जालौर कुल छः जिलों में बहते हुए कच्छ के रन’ में प्रवेश करके फैल जाती है। अधिक वर्षा होने पर यह नदी कच्छ की खाड़ी में गिरती है। (कुल लम्बाई 350 किमी., राजस्थान में 330 किमी.)
  • लूनी नदी को उद्गम स्थल पर सागरमती के रूप में जाना जाता है। पुष्कर से निकलकर आई सरस्वती नदी का मिलन सागरमती से गोविन्दगढ़ (अजमेर) में होता है। इसके पश्चात यह नदी ‘लूनी’ कहलाती है।
  • कच्छ के रन में प्रवेश करते समय यह नदी कई धाराओं में विभक्त होकर दलदल का निर्माण करती है। इस दलदली क्षेत्र को सांचोर (जालोर) में नेहड़’ कहते हैं।
  • उद्गम स्थल से बालोतरा (बाड़मेर) तक इस नदी का पानी मीठा है। पचपदरा झील की निकटता एवं लवणीय भूमि में बहने के कारण बालोतरा के बाद इसका जल खारा हो जाता है।
  • लूनी की सहायक नदियाँ जवाई, बांडी, लीलड़ी, गुहिया, सूकड़ी, एवं सागाई अरावली के पश्चिमी ढालों से निकलती हैं। जबकि इसमें दायीं ओर से मिलने वाली सहायक नदियाँ जोजरी, मीठड़ी एवं सरस्वती हैं।
  • लूनी नदी के किनारे बिलाड़ा एवं लूनी जंक्शन (जोधपुर),समदड़ी, बालोतरा, तिलवाड़ा, नाकोड़ा एवं गुढ़ामालानी (बाड़मेर) नामक नगर बसे हुए हैं।

लूनी की सहायक नदियों के संगम-स्थल–

सरस्वती : गोविन्दगढ़ (अजमेर)
जोजरी : काकेलाव (जोधपुर)
बान्डी : दुन्दाड़ा (जोधपुर)
सूकड़ी : समदड़ी (बाड़मेर)
जवाई : गांधव (बाड़मेर)

जवाई नदी

  • लूनी की सबसे लम्बी सहायक नदी ‘जवाई गोरियाँ गाँव (पाली) से निकलकर पाली, जालोर एवं बाड़मेर जिलों में बहते हुए गांधव (बाड़मेर) के निकट लूनी में मिल जाती है। बांडी, सुकड़ी एवं खारी इसकी सहायक नदियाँ हैं। इस नदी से जोधपुर एवं पाली शहरों को पेयजल व जालोर एवं पाली जिले के गाँवों को नहरों के माध्यम से सिंचाई सुविधाउपलब्ध करवाई गई है।
  • पाली जिले में सुमेरपुर के निकट इस नदी पर जवाई बाँध (मारवाड़ का अमृत सरोवर) बनाया गया है।
  • यह नदी पाली एवं सिरोही जिलों की सीमा बनाती है। सुमेरपुर (पाली), शिवगंज (सिरोही) एवं जालोर नगर इस नदी के किनारे स्थित हैं।
  • उदयपुर जिले की ‘सेई नदी का जल सुरंग के माध्यम से जवाई नदी में डाला जा रहा है।

माही नदी

  • ‘वागड़ एवं कांठल क्षेत्र की गंगा’ कहलाने वाली माही नदी मध्यप्रदेश के धार जिले की मेहद झील से निकलती है।
  • राजस्थान में माही नदी खांदू गाँव (बाँसवाड़ा) के समीप प्रवेश करके उल्टे ‘यू’ आकार (n) में घूमती हुई गुजरात में प्रवेश करके खम्भात की खाड़ी में गिरती हैं।
  • यह नदी राजस्थान में कर्क रेखा को दो बार काटती है।
  • यह नदी सर्वप्रथम बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़, तत्पश्चात् बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर जिलों के मध्य सीमा बनाती है।
  • माही नदी की कुल लंबाई 576 किमी. तथा राजस्थान में लंबाई 171 किमी. मानी गई है।
  • बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ जिलों में स्थित माही का अपवाह क्षेत्र छप्पन का मैदान’ कहलाता है।
  • माही नदी पर राज्य में दो एवं गुजरात में एक, कुल तीन बाँध बनाए गए हैं। राज्य में बाँसवाड़ा जिले के लोहारिया बोरखेड़ा गाँव के समीप ‘माही बजाज सागर बांध एवं ‘कागदी पिक-अप बाँध’ बनाये गये हैं। गुजरात के पंचमहल जिले में ‘कडाणा बाँध’ बनाया गया है।
  • बेणेश्वर (डूंगरपुर) में माही, सोम, जाखम का त्रिवेणी संगम है, जहाँ आदिवासियों का कुम्भ भरता है।
  • बेणेश्वर एवं गलियाकोट (डूंगरपुर) दोनों प्रसिद्ध तीर्थस्थल माही नदी के किनारे बसे हुए हैं।
  • माही की प्रमुख सहायक नदियाँ सोम, जाखम, लाखन,इरू, हरण, दर, अनास, चाप एवं मोरेन हैं।

सोम नदी

  • ऋषभदेव (उदयपुर) के निकट बाबलवाड़ा के जंगलों में स्थित बीछामेड़ा से निकल द.पू. में बहती हुई उदयपुर एवं डूंगरपुर जिलों की सीमा बनाती हुई ‘बेणेश्वर’ (डूंगरपुर) के निकट माही में मिल जाती है।
  • सोम की प्रमुख सहायक नदियाँ जाखम, झामरी, गोमती,सामरी, टीडी एवं सारनी हैं।

जाखम नदी (जोकम)

  • यह नदी छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़) से निकलकर उदयपुर एव  डूंगरपुर जिलों में बहते हुए बिलाड़ा गाँव के पास सोम नदी में मिल जाती है।
  • सहायक नदियाँ–करमाई एवं सूकली।

साबरमती नदी

  • साबरमती नदी का उद्गम उदयपुर जिले के दक्षिणी पश्चिमी भाग में कोटड़ा क्षेत्र के झाड़ोल के निकट से पाँच जलधाराओं के रूप में होता है, जो खेराज (गुजरात) के निकट जाकर आपस में मिल जाती हैं। यह नदी गुजरात में बहते हुए खम्भात की खाड़ी में गिरती है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ वाकल, हथमति, मेश्वा, वतरक, सेई एवं माजम हैं जो उदयपुर एवं डूंगरपुर जिलों से निकलती हैं। गांधीनगर एवं अहमदाबाद नगर (गुजरात) साबरमती के किनारे स्थित हैं।

पश्चिमी बनास नदी

  • यह नदी सिरोही नगर के पूर्व में स्थित ‘नया सनवाडा गाँव से निकलकर गुजरात में प्रवेश करके लिटिल रन से होते हुए कच्छ की खाड़ी में गिर जाती है।
  • प. बनास पर सरूपगंज (सिरोही) के निकट बनास बाँध बनाया गया है। ‘सिपू’ पश्चिमी बनास की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है।
  • आबू रोड़ (सिरोही) एवं गुजरात का डीसा नगर इसके किनारे स्थित है।

अनास नदी

  • आम्बेर गाँव (विंध्याचल पर्वत, म.प्र.) से निकलकर बाँसवाड़ा के मेलेड़ी खेड़ा से प्रवेश कर डूंगरपुर के गलियाकोट के निकट माही में मिल जाती है। हरण इसकी सहायक नदी है।

मोरेन नदी

  • डूंगरपुर की पहाड़ियों से निकलकर गलियाकोट के निकट माही में मिल जाती है।

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