विषाणु ( Virus) or विषाणु विज्ञान (Virology)

विषाणु ( Virus) or विषाणु विज्ञान (Virology)

विषाणु ( Virus) Gk in Hindi 

Vishanu ( Virus ) Gk Notes in Hindi

  • विषाणु की खोज रूसी वनस्पति वैज्ञानिक इवानोवस्की (Ivanovsky) ने 1892 ई. में तम्बाकू की पत्ती में मोजैक रोग (Mosaic disease) के कारण की खोज करते समय किया था। लुई पाश्चर तथा बीजरिंक ने इन्हें जीवित तरल संक्रामक का नाम दिया । एड्स (AIDS) क विषाणु को 1986 ई. में मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता वाइरस (HIV) नाम दिया गया ।
  • विषाणु अति सूक्ष्म, परजीवी, अकोशिकीय (Noncellular) और विशेष न्यूक्लियो प्रोटीन कण है, जो जीवित परपोषी के अन्दर रहकर जनन (Reproduction) करते है । विषाणु का सिफ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है। विषाणुओं के अध्ययन को विषाणु विज्ञान (Virology) कहा जाता है।

विषाणु की संरचना (Structure of virus) : 

  • विषाणु रचना में प्रोटीन के आवरण से घिरा न्यूक्लिक अम्ल होता है। बाहरी आवरण या capsid में बहुत सी प्रोटीन इकाइयाँ होती हैं जिन्हें capsomere कहते हैं। सम्पूर्ण कण को विरियन (Virion) कहते हैं।

विषाणु के प्रकार (Types of virus) :

  • परपोषी प्रकृति के अनुसार विषाणु मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
  1.  पादप विषाणु (Plant virus) : इनमें न्यूक्लिक अम्ल आर.एन. ए. (RNA) होता है। जैसे—टी.एम.वी.(T.M.V)
    2.जन्तु विषाणु (Animalvirus): इनमें न्यूक्लिक अम्ल सामान्यतः डी.एन.ए. (DNA) और कभी-कभी आर.एन.ए (RNA) होता है। जैसे—इनफ्लूएन्जा वायरस, मम्पस वायरस आदि ।
    3.बैक्ट्रियोफेज (Bacteriophage) या जीवाणुभोजी : ये केवल जीवाणुओं (Bacteria) के ऊपर आश्रित रहते हैं। इनमें न्यूक्लिक अम्ल के रूप में डी.एन.ए. (DNA) पाया जाता है । जैसे—टी-2 फेज (T-2 Phage)

विषाणु के निर्जीव होने के लक्षण

1. ये कोशा रूप में नहीं होते हैं।
2. इनको क्रिस्टल (Crystal) बनाकर निर्जीव पदार्थ की भाँति बोतल में भरकर कई वर्षों तक रखा जा सकता है।

विषाणु के सजीव होने के लक्षण

1. इनके न्यूक्लिक अम्ल का द्विगुणन होता है।
2. ये किसी जीवित कोशिका में पहुँचते ही सक्रिय हो जाते हैं और एन्जाइमों का संश्लेषण करने लगते हैं। 

विषाणुओं में प्रजनन (Reproduction in virus): 

  • विषाणु गुणन (Multiplication) की विधि के द्वारा प्रजनन करते हैं।

विषाणुओं से लाभ (Importance of virus) : 

  • विषाणुओं से निम्नलिखित लाभ हैं
  1.  विषाणुओं में सजीव एवं निर्जीव दोनों के गुण पाए जाने के कारण इसका उपयोग जैव विकास (evolution) के अध्ययन में किया जाता है।
    2. विषाणुओं की सहायता से जल को खराब होने से बचाया जाता है। जीवाणुभोजी (Bacteriophage) जल को सड़ने से रोकता है।
    3. ये नीले-हरे शैवालों की सफाई करने में सहायक होते हैं।

विषाण से हानि : 

  • विषाणुओं से होने वाली हानियाँ निम्नलिखित हैं-
  1. विषाणुओं से पौधों में अनेक प्रकार के रोग होते हैं। टोबैको मोजैक वायरस (TMV) से तम्बाक की पत्तियों में मौजेक रोग होता है। बेनाना वायरस-1 के द्वारा केले में बंकी टॉप ऑफ बनाना (Bunchy top of banana) नामक पादप रोग होता है, जिससे केले की फसल को भारी नकसान होता है। भारत में यह रोग इसके पड़ोसी देश श्रीलंका से आया है। आलू की फसल में पोटैटो मोजैक वायरस (Potato mosaic virus) द्वारा मोजैक रोग होता है जिसमें आलू की पत्तियाँ चितकबरापन (Mosaic) प्रदर्शित करती है।
    2. वायरस द्वारा मनुष्यों में खसरा (Measles), पीत ज्वर (Yellow fever), चेचक (Small pox), हपीज (Herpes), इन्फ्लू एन्जा (Influenza), पोलियो (Polio), रेबीज (Hydrophobia), गलसुआ (Mumps), ट्रेकोमा (Trachoma), एड्स (AIDS), मस्तिष्क शोथ (Encephalitis) आदि खतरनाक रोग होते हैं।

इने भी जरूर पढ़े :-

Leave a Reply