कार्य क्या है परिभाषा , प्रकार, मात्रक, विमीय सूत्र

कार्य क्या है परिभाषा , प्रकार, मात्रक, विमीय सूत्र

work definition in hindi and karya ka matrak aur prakar

कार्य (Work)

  • जब किसी वस्तु पर बल लगाकर उसकी स्थिति में परिवर्तन किया जाता है, तब यह क्रिया कार्य कहलाती है। उदाहरण साइकिल चलाना, खेलना, किसान का हल चलाना, मजदूर का गेहूँ की बोरी उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखना, आदि इन सभी क्रियाओं में कहा जाता है, कि व्यक्ति कार्य कर रहा है।
  • यदि किसी वस्तु पर F बल लगाकर उसे s दूरी तक विस्थापित किया जाता है, तब किया गया कार्य

W = F.s

  • अतः किसी वस्तु पर किए गए कार्य की माप, वस्तु पर आरोपित बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होती है।
  • यदि बल F =1 न्यूटन तथा विस्थापन s = 1 मीटर है, तब बल द्वारा किया गया कार्य 1 जूल होगा।
  • कार्य का SI मात्रक न्यूटन मीटर या जूल तथा CGS मात्रक अर्ग होता है। यह अदिश राशि है। कार्य में केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती है।

1 जूल = 107 अर्ग

किसी कोण पर बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Force Acting at an Angle)

  • यदि किसी वस्तु पर बल F’ लगाने से वस्तु का विस्थापन s बल की दिशा से 0 कोण पर हो, तब चित्र के अनुसार, बल द्वारा किया गया कार्य

W = Fs cos θ

  • कोण, θ =  0° पर किया गया कार्य अधिकतम तथा कोण, θ = 90° पर न्यूनतम होता है ।

कार्य क्या है परिभाषा , प्रकार, मात्रक, विमीय सूत्र

कार्य के प्रकार (Types of Work)

कार्य मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं–

1. धनात्मक कार्य (Positive Work)

  • जब बल तथा विस्थापन एक ही दिशा में होता है, तब बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा। धनात्मक कार्य का अर्थ है, कि बाह्य बल, निकाय या वस्तु को ऊर्जा प्रदान करते हैं।

उदाहरण —

  • यदि कोई व्यक्ति किसी पिण्ड को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाता है, तो उसके द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा।
  • जब किसी लॉन रोलर को हत्थे के अनुदिश, क्षैतिज से न्यूनकोण पर बल लगाकर खींचा जाता है, तो आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा।
  • जब किसी स्प्रिंग को खींचा जाता है, तो बाह्य बल (खिंचाव बल) द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होगा।

2. ऋणात्मक कार्य (Negative Work) —

  • जब बल तथा विस्थापन विपरीत दिशा में होते हैं, तब बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा। ऋणात्मक कार्य का अर्थ है, कि बल निकाय से ऊर्जा लेता है।

उदाहरण —

  • यदि कोई व्यक्ति किसी पिण्ड को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाता है, तो गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  • जब कोई पिण्ड बल लगाने पर खुरदरे (rough) तल पर फिसलता है, तो घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।

3. शून्य कार्य (Zero Work)

  • जब बल तथा विस्थापन लम्बवत् दिशा में होते हैं, तब बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा ।

उदाहरण —

  • यदि कोई कुली सिर पर बोझ उठाकर प्लेटफॉर्म पर चल रहा है, तो वह कोई कार्य नहीं करता (क्योंकि उसका कार्य गुरुत्व बल के लम्बवत् है)। जब वस्तु का विस्थापन, लगाए गए बल की दिशा में होता है, तो किया गया कार्य अधिकतम होगा। यदि वस्तु का विस्थापन शून्य है, तो वस्तु पर लगा बल कोई कार्य नहीं करेगा; जैसे सिर पर बोझा लिए खड़ा मजदूर कोई कार्य नहीं करता, चाहे वह खड़ा खड़ा थक ही क्यों न जाए ।
  • जब एक वस्तु एकसमान चाल से वृत्ताकार पथ में गति करती है, तो अभिकेन्द्रीय बल हमेशा वस्तु के विस्थापन के लम्बवत् होता है, अर्थात् अभिकेन्द्रीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।

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कार्य (Work) FAQ  :- 

1 kwH कितने जूल के बराबर होते हैं:-
A. 1000 जूल
B. 3.6 ×10⁵ जूल
C. 3.6×10⁶ जूल
D. 3.6× 10³ जूल

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उत्तर ⇒ { C. 3.6 ×10⁶ जूल }

2)1HP(horse power) का मान किसके बराबर होते हैं:-
A. 500वाट
B. 240 वाट
C. 340 वाट
D. 746 वाट

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उत्तर ⇒ { 4. 746 वाट }

3) किसी h मीटर उँचाई पर स्थित वस्तु मे संचित होती है:-
1.स्थितिज उर्जा
2.गतिज उर्जा
3.गुरुत्व उर्जा
4.चुम्बकीय उर्जा

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उत्तर ⇒ { 1. स्थितिज उर्जा }

4) शक्ति का SI मात्रक है:-
1.वाट
2.जूल
3.टेसला
4.ओम

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उत्तर ⇒ { 1. वाट }

5) कार्य का SI मात्रक है:-
1. वाट
2.जूल
3.टेसला
4. ओम

उत्तर ⇒ ???????

कार्य का फार्मूला क्या है?

  • वर्क =फाॅर्स ×डिस्टेंस कार्य का विमीय सूत्र है।

कार्य कितने प्रकार के होते हैं?

कार्य के प्रकार:

  1. धनात्मक कार्य
  2. ऋणात्मक कार्य
  3. शून्य कार्य
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