मुगल वंश | अकबर (1556-1605 ई.)

मुगल वंश | अकबर (1556-1605 ई.) ,

मुगल वंश | अकबर (1556-1605 ई.)

  • अकबर का जन्म 1542 में अमरकोट में हुआ था तथा इसके बचपन का नाम बदरुद्दीन था।
  • हुमायूँ जब फारस गया तब इसे अस्करी के संरक्षण में छोड़ गया।
  • हुमायूँ एवं अकबर की दुबारा मुलाकात 3 वर्ष बाद हुई तभी इसका नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर रखा गया।
  • हुमायूँ की मृत्यु के समय अकबर पंजाब में सिकन्दर सूर के विरुद्ध सैन्य अभियान में व्यस्त था।
  • हुमायूँ की मृत्यु की सूचना मिलने पर पंजाब में गुरुदासपुर जिले में स्थित कलानौर नामक स्थान पर 14 फरवरी 1556 को अकबर का राज्याभिषेक हुआ।
  • गद्दी पर बैठने के बाद अकबर को पानीपत का द्वितीय युद्ध लड़ना पड़ा।
  • यह युद्ध मुहम्मद आदिल शाह के सेनापति हेमू और अकबर के बीच लड़ा गया।
  • प्रारम्भ में हेमू ने आगरा और दिल्ली पर अधिकार करके दिल्ली में अपने को स्वतंत्र शासक घोषित किया और विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।
  • जब हेमू पंजाब की ओर बढ़ा तो 5 नवम्बर 1556 को पानीपत के मैदान में अकबर की सेना के साथ युद्ध हुआ।
  • इस युद्ध में हेमू पराजित हुआ और इसकी हत्या कर दी गई।
  • पानीपत के प्रथम युद्ध ने भारत में मुगलवंश की स्थापना की थी किन्तु दुसरे युद्ध ने भारत में मुगलों की शक्ति को पुनः स्थापित किया। .
  • जब बैरम खाँ मक्का जा रहा था तब गुजरात में पाटन नामक स्थान पर 1561 में इसकी हत्या कर दी गई।
  • 1560 से 1564 तक अकबर हरम की स्त्रियों के प्रभाव में रहा। अकबर पर इसकी धाय मां माहमअनगा का सर्वाधिक प्रभाव था।
  • 4 वर्ष के इस शासन को पर्दा शासन के नाम से जाना जाता है।

अकबर के प्रमुख अभियान

साम्राज्य विस्तार

  • मालवा के विरुद्ध अभियान से लेकर असीरगढ़ के पतन तक चार दशकों (40 वर्ष) के दौरान अकबर की भूमिका एक महान विजेता तथा साम्राज्य निर्माता की थी।

मालवा विजय

  • सर्वप्रथम अकबर ने 1561-62 में मालवा के शासक बाजबहादुर को पराजित कर मालवा को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

गोडवाना विजय

  • 1564 में अकबर ने गोडवाना अभियान किया और यहां की राजधानी चौरागढ़ के निकट एक युद्ध में रानी दुर्गावती को पराजित कर दिया और यहां मगलों का अधिकार हो गया।

राजपूताना विजय

  • राजस्थान में साम्राज्य विस्तार के लिए अकबर द्वारा अपनाई गई नीति की विशेषता थी :(1) स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार करने वाले अथवा _ विवाह संबंधों के इच्छुक राजपूत राजाओं को अपनी 1576 में अकबर ने राणा प्रताप के विरुद्ध आक्रमण किया परिणामस्वरूप हल्दीघाटी का युद्ध हुआ।
  • इस युद्ध में मुगल विजयी रहे।

गुजरात विजय

  • इस समय गुजरात का शासक मुजफ्फर खाँ तृतीय था।
  • 1572 में अकबर ने स्वयं गुजरात अभियान किया तथा 1573 में इसे जीतकर मुगल साम्राज्य में मिला लिया। दक्षिण विजय अकबर पहला मुगल शासक था जिसने दक्षिण अभियान किया।
  • इस समय दक्षिण में खान देश, अहमदनगर, बीजापुर और गोलकुंडा प्रमुख सल्तनत थे। खान देश दक्षिण का पहला राज्य था  जिसने स्वेच्छा से अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।

अहमदनगर अभियान 

  • सर्वप्रथम 1593 में अकबर ने एक मुगल सेना अहमदनगर विजय के लिए भेजी।
  • इस समय अहमदनगर की सुरक्षा का भार चांद बीबी पर था जो अहमदनगर के शासक निजामशाह की पुत्री थी। 1601 में इसने किले को जीत लिया तथा दक्षिण विजय के उपलक्ष्य में अकबर ने दक्षिण के बादशाह की उपाधि धारण की।

अन्य कार्य

  • अकबर 1562 में युद्ध में बंदी बनाये गए लोगों के लिए दास प्रथा समाप्त कर दिया।
  • 1563 में इसने तीर्थ यात्रा कर तथा 1564 में जजिया कर समाप्त किया।
  • 1575 में फतेहपुर सीकरी में इसने एक इबादतखाना का निर्माण कराया।
  • इसका उद्देश्य धर्म की सत्यता को जानने की उत्सुकता थी। .
  • जैन विद्वानों में हरि विजय सूरि जिसको इसने जगतगुरु तथा जिन चन्द्र सूरि जिसे इसने युग प्रधान की उपाधि दी। अकबर इनसे प्रभावित हुआ।
  • हिन्दू धर्म के कर्म एवं पुनर्जन्म के सिद्धान्त को ग्रहण किया।
  • यह हिन्दू धर्म से सर्वाधिक प्रभावित हुआ।
  • 1580 में पहला ईसाई मिशन फतेहपुर सीकरी पहुँचा जिसमें मॉसरेट, अक्वेविया और एनरिक्वेज इसके सदस्य थे। अकबर ने इनसे भी वार्ता की।
  • सितम्बर 1579 में महजर घोषणा-पत्र नाम से एक दस्तावेज जारी किया जिसकी रचना शेख मुबारक ने की थी।

अकबर के नौरत्न

1.अबुल फजल 2.फैजी
3.बीरबल 4.तानसेन
5.राजा मानसिंह 6. टोडरमल
7. अब्दुर्रहीम खानखाना 8. मुल्ला दो प्याजा
9. हकीम हुमाम

अकबर के प्रमुख कार्य –

  • -1562 ई. में दास प्रथा की समाप्ति
  • -1563 ई. में तीर्थयात्रा कर की समाप्ति
  • -1564 ई. में जजिया कर की समाप्ति
  • – 1575 ई. में इबादतखाने का निर्माण
  • -1578 ई. में इबादतखाना सभी धर्मों के विद्वानों के लिए खोला गया।
  • – 1579 ई. में महजर की घोषणा
  • – 1582 ई. में दीन-ए-इलाही की स्थापना

अकबर के समय में प्रमुख विद्वान

1.अबुल फजल – अकबरनामा
2. निजामुद्दीन अहमद –  तबकात-ए-अकबरी
3.अब्दुल कादिर बदायूनी – मुन्तखब-उत-तवारीख
4.फैजी –  कवि थे अनेक संस्कृत ग्रंथों का फारसी अनुवाद किया
5.बीरबल –  हिन्दी के विद्वान
6.अब्दुर्रहीम खानखाना –  रहीम सतसई
7.राजा भानसिंह –  हिन्दी के विद्वान

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Reasoning Notes 

Biology Notes

Polity Notes

Physics Notes


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